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चंडीगढ़ के 24×7 पानी सप्लाई प्रोजेक्ट पर कैग को पत्र: सांसद बोले – 24 घंटे पानी देने का दावा, मिल रहा दो घंटे, ऑडिट हो – Chandigarh News

चंडीगढ़ के 24×7 पानी सप्लाई प्रोजेक्ट पर कैग को पत्र:  सांसद बोले – 24 घंटे पानी देने का दावा, मिल रहा दो घंटे, ऑडिट हो – Chandigarh News


सांसद मनीष तिवारी ने मनीमाजरा के पानी के प्रोजेक्ट को लेकर कैग को लिखा पत्र

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चल रहे 24×7 मनीमाजरा पायलट प्रोजेक्ट के मामले में अब सांसद मनीष तिवारी ने कैग को पत्र लिखा है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट की डिटेल ऑडिट की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि प्रोजेक्ट सार्वजनिक धन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों

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सांसद मनीष तिवारी द्वारा कैग को लिखे पत्र की कॉपी।

सांसद ने पत्र में उठाए हैं 4 सवाल, जो कि इस प्रकार है

1. पायलट प्राेजेक्ट की हालत खराब

सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि 591.57 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य चंडीगढ़ को 24 घंटे स्वच्छ पीने का पानी मुहैया करवाने वाला देश का पहला शहर बनाना था। लेकिन 166.06 करोड़ रुपये की लागत से बने मनीमाजरा पायलट प्रोजेक्ट की हालत खराब है -न तो किसी क्षेत्र में लगातार पानी मिल रहा है और न ही पानी की गुणवत्ता संतोषजनक है।

2.दो से चार घंटे मिल रहा है पानी

सांसद ने पत्र में लिखा है कि लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें सिर्फ 2-4 घंटे ही पानी मिलता है, जो कई बार दूषित होता है। वहीं, नगर निगम अधिकारियों ने भी माना है कि पानी आपूर्ति की मात्रा में कोई सुधार नहीं हुआ। तिवारी ने कहा कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। एमसीसी अब पूरे प्रोजेक्ट को रद्द करने पर विचार कर रहा है क्योंकि यह वित्तीय रूप से अव्यावहारिक हो चुका है। बढ़ती लागत और ब्याज के कारण पानी के बिल दोगुने तक बढ़ सकते हैं।

3.प्रोजेक्ट की चल रही विजिलेंस जांच

सांसद ने यह भी बताया कि इस परियोजना में सड़कों की मरम्मत जैसी महत्वपूर्ण लागतों को डीपीआर में शामिल ही नहीं किया गया, जिससे खर्च और बढ़ जाएगा। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद विजिलेंस विभाग जांच कर रहा है, लेकिन एमसीसी ने अधूरी फाइलें सौंपी हैं।

4. सांसद ने ऑडिट की वजह भी पत्र में बताई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच को प्रभावित करने की कोशिशें भी की जा रही हैं। इन हालात में, सीएजी से मांग की है कि वह प्रोजेक्ट की संपूर्ण जांच करे, जिसमें कुल लागत, फंडिंग स्रोत, ठेके की प्रक्रिया, फंड का उपयोग, तकनीकी गुणवत्ता और वास्तविक परिणामों की समीक्षा शामिल हो। उन्होंने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर जनता के धन, स्वास्थ्य और आवश्यक सेवाओं से जुड़ा है, इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीएजी की स्वतंत्र जांच जरूरी है।



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