राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने डीडवाना में ग्रीन बेल्ट के रूप में चिह्नित भूमि पर सर्किट हाउस निर्माण के आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस (डॉ.) नूपुर भाटी ने इस संबंध में दायर सिविल रिट पिटीशन में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया है। इसके साथ ही राज
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डीडवाना के शेखा बासनी निवासी मोहम्मद यूनुस खान, मोहम्मद यूसुफ, रुस्तम और लियाकत खान ने इस मामले में याचिका दायर की थी।
संदर्भ केस: विवादित भूमि ग्रीन बेल्ट में चिन्हित
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट का ध्यान समान विवाद वाले मामले बार एसोसिएशन रानी बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि समन्वय पीठ ने 10 मई 2023 के आदेश द्वारा नोटिस जारी करते समय अंतरिम आदेश दिया था।
वकील ने कोर्ट का ध्यान रानी खुर्द के लिए स्वीकृत मास्टर प्लान (वर्ष 2010-2031) की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट रूप से प्रावधान था कि आबादी का विकास आवासीय क्षेत्र में होगा, जबकि खसरा नंबर 798 से 802 की विवादित भूमि को ग्रीन बेल्ट के रूप में चिह्नित किया गया था और गोचर भूमि के रूप में दर्ज किया गया था। हालांकि, विवादित आदेश के माध्यम से कलेक्टर ने खसरा नंबर 798 से 802 में से सिविल कोर्ट भवन के लिए भूमि अलग कर दी।
वकील ने बताया कि कलेक्टर ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 162 के तहत प्रक्रिया का पालन किए बिना विवादित आदेश पारित किया है और सार्वजनिक नोटिस जारी करके आपत्तियां आमंत्रित नहीं की गई हैं।
डीडवाना मामले में वकील का तर्क
याचिकाकर्ताओं के वकील ने इस कोर्ट का ध्यान डीडवाना के लिए स्वीकृत मास्टर प्लान (वर्ष 1998-2023) की ओर आकर्षित किया। वकील ने कहा कि आबादी का विकास आवासीय क्षेत्र में होगा, जबकि खसरा नंबर 359 से 360 की विवादित भूमि को ग्रीन बेल्ट के रूप में चिह्नित किया गया था और इवेक्यूई लैंड (निष्क्रांत संपत्ति) के रूप में दर्ज किया गया था। हालांकि, विवादित आदेश के माध्यम से कलेक्टर ने खसरा नंबर 354 से 360 में से सर्किट हाउस भवन के लिए भूमि अलग कर दी।
क्या है इवेक्यूई लैंड (निष्क्रांत संपत्ति)
निष्क्रांत संपत्ति से तात्पर्य उस संपत्ति से है, जो 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए लोगों द्वारा छोड़ी गई थी।
दरअसल, 1947 में विभाजन के दौरान जो लोग भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। इन लोगों की संपत्तियां – आवासीय भवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, कृषि भूमि आदि – भारत में छोड़ दीं। उसी संपत्ति को निष्क्रांत संपत्ति (Evacuee Property) कहा जाता है।
भारत सरकार ने निष्क्रांत संपत्ति प्रशासन अधिनियम, 1950 पारित किया था। इसके तहत भारत सरकार इन संपत्तियों की संरक्षक (Custodian) बन गई।
कोर्ट ने माना मामले पर विचार की जरुरत है…
कोर्ट ने माना कि मामले पर विचार की आवश्यकता है। कोर्ट ने नोटिस जारी किया और स्टे आवेदन का भी नोटिस जारी किया, जो छह सप्ताह के भीतर वापसी योग्य है। इस बीच, विवादित भूमि के संबंध में जैसी आज स्थिति है, वैसी ही दोनों पक्षों द्वारा बनाए रखी जाए। इस मामले को रानी खुर्द के समान विवाद वाले मामले के साथ जोड़ा गया।
