प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) इलाहाबाद के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत फैकल्टी सदस्य डॉ. वेंकटेश नायक ने संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ फैकल्टी सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्स पर वीडियो
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डॉ. नायक का आरोप है कि षड्यंत्र के तहत उन्हें गैर-वाजिब तरीके से निलंबित किया गया और उनके दस्तावेजों के साथ जालसाजी की गई।
कब क्या आरोप लगे …
2022: एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए पात्र (76 पॉइंट्स) होने के बावजूद प्रमोशन रोका गया।
2023: चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।
2024: शॉर्टलिस्ट से बाहर रखा गया।
सितंबर 2025: एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया (12 व 18 सितंबर)।
19 सितंबर 2025: निलंबन आदेश जारी जबकि डॉ. नायक का दावा है कि 15 से 17 सितंबर के बीच उनके खिलाफ साजिश रची गई।
डॉ. नायक का कहना है कि निलंबन के बावजूद अब तक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट जारी नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम जानबूझकर उन्हें और उनके भाई एम. दिवाकर नायक (एसटी कैटेगरी) को चयन प्रक्रिया से दूर रखने के लिए उठाया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप
डॉ. नायक ने संस्थान के डायरेक्टर एम.एम. गोरे, प्रो. आर.एस. वर्मा, और रजिस्ट्रार अंबकराय पर सीधा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इन अधिकारियों ने मिलकर उनके कागजात को बैकडेटेड बनवाया और उनमें जालसाज़ी की।
उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर उच्चाधिकारियों से न्याय की मांग की है और कहा कि दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस मामले पर एमएनएनआईटी इलाहाबाद प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
