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रोहिणी आचार्य के पोस्ट से लालू परिवार में घमासान: लिखा-मैं राजनीति छोड़ रही हूं, विवादों में घिरे रमीज नेमत पर सवाल – Balrampur News

रोहिणी आचार्य के पोस्ट से लालू परिवार में घमासान:  लिखा-मैं राजनीति छोड़ रही हूं, विवादों में घिरे रमीज नेमत पर सवाल – Balrampur News


सुजीत कुमार | बलरामपुर3 मिनट पहले

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बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। शनिवार को लालू यादव की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, जिसने न केवल पार्टी बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में सनसनी फैला दी।

रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।” इस एक लाइन ने राजद के भीतर छिपे तनाव को उजागर कर दिया।

पोस्ट में जिस रमीज का जिक्र रोहिणी ने किया, वह रमीज नेमत हैं। वह उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं और सपा के पूर्व सांसद रिजवान जहीर के दामाद हैं। रमीज का नाम सामने आते ही इंटरनेट मीडिया पर उनकी तस्वीरें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ वायरल होने लगीं।

रमीज नेमत राजद के सोशल मीडिया और चुनाव प्रबंधन की कमान संभालते रहे हैं। उनकी पत्नी जेबा रिजवान दो बार तुलसीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ चुकी हैं।

तुलसीपुर तहसील के भंगहाकला गांव के मूल निवासी रमीज नेमत की छवि विवादों से घिरी रही है। उनके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। आपराधिक सफर की शुरुआत 2021 में हुई, जब पंचायत चुनाव के दौरान हुए संघर्ष में उनके खिलाफ हिंसा, आगजनी और बलवे का मामला दर्ज हुआ। हालांकि, बाद में अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया।

2022 में तुलसीपुर नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन फिरोज पप्पू की हत्या के मामले में रमीज नामजद आरोपी बने। इसी मामले में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई। उनके विरुद्ध कौशांबी जिले के कोखराज थाने में भी हत्या का मुकदमा दर्ज है। लंबे समय तक बलरामपुर जेल में बंद रहने के बाद, वह अप्रैल 2025 में जमानत पर रिहा हुए।

रमीज के नाम के साथ रोहिणी आचार्य के सार्वजनिक आरोपों ने अब एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। लालू परिवार की अंदरूनी खींचतान, चुनावी रणनीति और बाहरी दखल की चर्चाएं अब पूरे राजनीतिक परिदृश्य को गर्माए हुए हैं।



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