इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जिले स्तर के अधिकारी जानबूझकर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को लागू नहीं कर रहे। यांत्रिक व तकनीकी कारणों से किसान परिवार पर आई अचानक विपत्ति में राहत देने से इंकार कर देते हैं और जब कोर्ट जिलाधिकारी को अपने आदेश का औचित्य बताने को कहती हैं तो बचाव के बजाय भुगतान कर देते हैं। कोर्ट ने कहा यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है जिसके कारण कल्याणकारी योजना को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा। यह सिस्टम की असफलता है। प्रमुख सचिव राजस्व को तलब किया कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व को 27 मई को जिलाधिकारी कौशाम्बी सहित तलब किया है और उन्हें कुछ सवालों का जवाब लाने को कहा है। कोर्ट ने पूछा है कि 1- प्रदेश में कृषक कल्याण योजना के तहत दावों के निपटारे व निगरानी का क्या कोई सिस्टम है। 2-जिलाधिकारी द्वारा बार बार तकनीकी या दाखिले में देरी पर दावा निरस्त करने का क्या कारण है। 3-सभी जिलाधिकारी एक जैसा काम करें इसके लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। 4-विपत्ति में आये परिवार को राहत से इन्कार पर सुधारात्मक उपाय क्या हैं। याचिका की अगली सुनवाई 27 मई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव तथा न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने श्रीमती सुनीता देवी की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। हर दिन याचिकाएं आ रहीं हैं कोर्ट ने कहा कि इस योजना को लेकर समय से निस्तारण या देरी से निस्तारण की भारी संख्या में याचिकाएं हर दिन आ रही। राज्य सरकार ने कमाऊ सदस्य की मौत पर अचानक संकट में आये किसान परिवार की मदद की कल्याणकारी योजना लागू की है, किंतु जिले स्तर के अधिकारियों के रवैये के कारण योजना का उद्देश्य विफल हो रहा।
अधिकारी मानवीय दृष्टिकोण लेकर काम नहीं करते। यह व्यक्तिगत गलती नहीं सिस्टम की विफलता कहीं जायेगी। जिस पर जिन योजना को लागू करने की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व उ प्र लखनऊ को मांगी गई जानकारी के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है।
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