अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में टॉयलेट में प्रसव के बाद पांच दिनों तक वेंटिलेटर में रखे गए नवजात की अंततः मौत हो गई। चिकित्सकों के अनुसार नवजात प्री मैच्योर था। उसके जैविक अंग अविकसित थे। ऐसे में उसे बचाना काफी मुश्किल था। प्रसूता करीब 7 माह क
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जानकारी के मुताबिक, सूरजपुर जिले के प्रतापपुर निवासी रामपति बाई पति सूरज सात को राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के एमसीएच में भर्ती कराया गया था। वह 7 माह की प्रेग्नेंट थी। उसे प्रसव पीड़ा होने लगी थी। प्रसव की तिथि से दो माह पूर्व प्रसव पीड़ा होने के कारण उसका इलाज किया जा रहा था।
टायलेट में हो गया था प्रसव
टॉयलेट में हो गया था प्रसव 15 नवम्बर की सुबह 10.30 बजे रामपति बाथरूम गई थी और उसके बाद वापस वार्ड में आकर सो गई थी। आधे घंटे बाद महिला को एहसास हुआ कि उसका पेट खाली है, जिसके बाद उसने शोर मचाया तो हड़कंप मच गया। इस दौरान अस्पताल के सफाईकर्मियों ने बाथरूम के सेप्टिक सीट की जांच की तो नवजात सेप्टिक सीट के मुर्गा में फंसा हुआ था।
स्वास्थ्य कर्मियों ने उसे कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया था। बच्चे को अस्पताल के SNCU के वेंटिलेटर पर रखा गया था और चिकित्सक उसका उपचार कर रहे थे। वह लगभग एक घंटे तक सेप्टिक सीट में फंसा रहा, जिसके बाद भी वह चमत्कारिक रूप से जीवित था।
इलाज के दौरान हो गई मौत चिकित्सकों के उपचार से दो दिनों बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ, जिसके बाद उसे वेंटिलेटर से बाहर निकाल लिया गया था लेकिन बाद में फिर से उसकी तबीयत बिगड़ गई तो उसे वेंटिलेटर में रखकर उसका उपचार किया जा रहा था। उपचार के दौरान नवजात जिंदगी की जंग हार गया। बच्चे की मौत के बाद उसका शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।
प्री मैच्योर था बच्चा, इसलिए नहीं बचा सके-CS सिविल सर्जन व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके रेलवानी ने बताया कि बच्चा प्री मैच्योर था। इसके साथ ही उसके जैविक अंग पूर्णत: अविकसित थे। ऐसे बच्चों के बचने की संभावना कम रहती है। हमने अपनी ओर से प्रयास किया था, वह कुछ दिनों तक ठीक भी था, लेकिन हम उसे नहीं बचा सके।
