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पति की डेडबॉडी पर सिर रखकर पत्नी का सवाल: क्या इसीलिए लव मैरिज की, कहा था-जल्दी आऊंगा और कफन में लौटे, 4 दोस्तों की दर्दनाक कहानी – Madhepura News

पति की डेडबॉडी पर सिर रखकर पत्नी का सवाल:  क्या इसीलिए लव मैरिज की, कहा था-जल्दी आऊंगा और कफन में लौटे, 4 दोस्तों की दर्दनाक कहानी – Madhepura News

क्या इसीलिए मेरे साथ सबसे लड़कर शादी की थी…इस छोटे से बच्चे को कैसे पालूंगी, अभी तो हमारी जिंदगी शुरू ही हुई थी। इतनी जल्दी छोड़कर कोई जाता है क्या…? फोन पर कह रहे थे सुबह जल्दी आ जाऊंगा, लेकिन इस तरह कोई आता है क्या? ये मार्मिक सीन उस घर का है, जहां आंगन में बेटे की अर्थी रखी थी और ढाई साल पहले लव मैरिज करने वाली पत्नी चीख मारक पति की लाश से सवाल कर रही थी। ये दृश्य देखकर हर किसी आंखें नम हो गई। वहां मौजूद लोग उस बच्चे की तरफ देखने लगते, जो सिर्फ डेढ़ साल का है, जिसे जिंदगी और मौत के बारे में कुछ पता ही नहीं। अपनी मां को रोता देख वह भी चीखने लगता है। दरअसल, मधेपुरा में शनिवार सुबह सड़क हादसे में 4 जिगरी दोस्तों की मौत हो गई। हादसा सुबह 4 बजे NH-106 के पास बिजली ऑफिस के सामने हुआ। यहां तेज रफ्तार हाइवा ने कार को रौंद दिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के वक्त कार की रफ्तार करीब 120KM/H थी, जिससे कार पर हाइवा चढ़ गया। हादसे में कार में सवार सभी 4 लोग बुरी तरह फंस गए। मृतकों की पहचान गुलजारबाग वार्ड-20 निवासी सोनू कुमार(30), मस्जिद चौक वार्ड-13 निवासी साहिल राज(24), उदाकिशुनगंज प्रखंड के आनंदपुरा निवासी साजन कुमार(28) और भर्राही थाना क्षेत्र के धुरगांव पंचायत के गिद्धा टोला वार्ड-11 निवासी रूपेश कुमार (26) के रूप में हुई है। अब घटना से जुड़ी 4 तस्वीरें देखिए…. बार-बार हो रही थी बेहोश साजन की पत्नी दैनिक भास्कर की टीम मधेपुरा जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर सबसे पहले साजन के घर पहुंची। घर के बाहर गांववालों की भीड़ थी, हर आंख नम थी। घर के अंदर साजन की पत्नी प्रीती बेहोश हालत में जमीन पर पड़ी थी। महिलाएं उनके मुंह पर पानी छिड़क कर होश में लाने की कोशिश कर रही थीं। पूरे कमरे में महिलाओं की भीड़ थी। वहीं, मां के पास बैठा बच्चा अपने पिता को याद कर चिल्ला रहा था। बच्चे की जुबान पर सिर्फ एक ही शब्द था पापा..पापा…पापा…। हम जब आगे बढ़े तो माता-पिता भी अपने बेटे की याद में रो रहे थे। उनका कहना था साजन की मेडिकल कॉलेज के पास लैब और दवा की दुकान है। उसके दोस्त सोनू को शुक्रवार रात 8 बजे बेटा हुआ था। उसी को देखने के लिए सभी लोग एक कार से साथ गए थे। सुबह घर लौटने वक्त हादसा हो गया। मेरा बच्चा घर से कहकर निकला था, दोस्त के साथ खुशी मनाकर घर लौट आऊंगा, लेकिन हमें ये नहीं पता था कि अब हमारा चिराग कभी घर नहीं लौट पाएगा। बेटे को मैं अकेले कैसे पालूंगी?.. पत्नी प्रीति ने बताया, ढाई साल पहले मैं और साजन अपनी फैमिली से बहुत लड़े थे। हम 4 साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे, लेकिन हमारे परिवारवाले मान नहीं रहे थे। जैसे-तैसे हमने अपने परिवार वालों को मनाया। 2024 में हमारी शादी हुई। इसके बाद 2025 में हमें एक बेटा हुआ। हमारी फैमिली अब खुश थी, लेकिन तभी अचानक साजन की मौत की खबर आ गई। अब मैं अपने बेटे को अकेले कैसे पालूंगी। साजन के घर से निकलते ही हम 2KM आगे सोनू के घर पहुंचे। सोनू के घर शुक्रवार की रात खुशियों से सराबोर थी। पत्नी सोनी ने बेटे को जन्म दिया था। पटाखे फूट रहे थे, मिठाइयां बंट रही थीं और घर में बधाइयों का तांता लगा था। लेकिन शनिवार की सुबह सब कुछ बदल गया। बेटे के जन्म के कुछ ही घंटे बाद सोनू की सड़क हादसे में मौत की खबर पहुंची। खुशियों से गूंज रहा आंगन अचानक चीत्कार और मातम में बदल गया। पति की मौत से बेखबर अस्पताल में बेहोश पड़ी रही पत्नी सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब सोनू की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी। उस वक्त उसकी पत्नी सोनी अस्पताल में बेहोश पड़ी थी। परिजनों ने उसे करीब पांच घंटे बाद यह बताया कि उसका पति अब इस दुनिया में नहीं रहा। जिस बच्चे ने अभी दुनिया में आंखें खोली भी नहीं थी, उसने अपने पिता का चेहरा देखे बिना ही उन्हें खो दिया। सोनू के पांच साल के बड़े बेटे के सिर से भी पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। घर की पूरी जिम्मेदारी सोनू पर थी सोनू दो भाइयों में बड़ा था और कंप्यूटर रिपेयरिंग का काम कर पूरे परिवार का पालन-पोषण करता था। पिता अशोक साह ने बताया, शुक्रवार शाम करीब सात बजे सोनू अस्पताल में भर्ती पत्नी के लिए कंबल लेने घर आया था। उस वक्त घर में खुशी का माहौल था। किसी को अंदाजा नहीं था कि सुबह होते-होते पूरा घर उजड़ जाएगा। 60 साल की दादी ने पोते को दी मुखाग्नि धुरगांव पंचायत के गिद्धा टोला वार्ड-11 निवासी रूपेश कुमार अपने माता-पिता का इकलौता कमाऊ बेटा था। हादसे की खबर मिलते ही मां रेखा देवी, पिता रामनरेश दास और बहन सोनी कुमारी बार-बार बेहोश हो रहे थे। परिवार में ऐसा कोई नहीं था जो मुखाग्नि दे सके। आखिरकार 60 साल की दादी ने कांपते हाथों से अपने पोते को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। रूपेश सुधा दूध के कारोबार से जुड़ा था और परिवार की आर्थिक रीढ़ था। दादी लक्ष्मी देवी ने बताया, रूपेश इस बार दरोगा बनने की तैयारी कर रहा था। इस बार वह दरोगा की परीक्षा में पास कर जाता। 15 साल से अपने पोते रूपेश को मधेपुरा में पढ़ाया। मैं भी उसी के साथ रहती थी। उसे खाना बनाकर खिलाती थी। मेरी आंख खराब हो गई, तो मैं गांव में रहने लगी। फिर भी रूपेश कहता था- चलो दादी मेरे पास रहना। मैं ही खाना बनाकर खिलाउंगा। उन्होंने आगे बताया, रूपेश कहता था कि नौकरी करने के बाद शादी करेंगे। 22 साल उसका उम्र हुआ था, हमलोग इस बार उसकी शादी करवाने की तैयारी में थे। रूपेश से मेरा बहुत लगाव था। परिवार में और कोई नहीं था। सबसे छोटा था साहिल, मां से आखिरी बात बनी विदाई मस्जिद चौक वार्ड-13 निवासी साहिल राज अपने परिवार में सबसे छोटा और सबका लाडला था। वह मधेपुरा में ठेकेदारी का काम करता था। पिता सुबोध साह ने बताया, शुक्रवार रात करीब 9 बजे साहिल ने अपनी मां को फोन कर कहा था- दोस्त को बेटा हुआ है, हम सब उसे देखने जा रहे हैं। बच्चे के लिए दवा भी लानी है, इसलिए आज घर नहीं आ पाऊंगा, सुबह लौट आएंगे। मां को क्या पता था कि बेटे से हुई यह बातचीत उसकी आखिरी बातचीत साबित होगी। अब हादसे की कुछ ऐसी तस्वीरें आपको दिखाते हैं जो विचलित करने वाली हैं। चार मृतकों में तीन के सिर कुचला गए हैं। एक की आंखें बाहर निकल गई है। कार के अंदर खून ही खून है, जो गेट से भी बह कर नीचे आ गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई थी। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से लाश को खींच-खींचकर बाहर निकाला गया। कार के गेट से बह रहा था खून टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार हाईवा में ही चिपक गई, जिससे ड्राइव कर रहे युवक का सिर बाहर की तरफ लटक गया। जबकि बगल में बैठा युवक उछल कर ड्राइविंग तक पहुंच गया। गाड़ी के अंदर खून ही खून नजर आ रहा है। हादसे में आस-पास के झोपड़ियों को भी नुकसान पहुंचा है। ड्राइवर की तलाश जारी सदर थाना पुलिस ने हाइवा और कार को जब्त कर लिया है। ड्राइवर की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाना हादसे की मुख्य वजह लग रही है। मामले की गहन जांच की जा रही है। अब पढ़िए उन पीड़ितों की कहानी जिनकी झोपड़ी सोते-सोते उजड़ गई। प्रत्यक्षदर्शी रंजित ने बताया, मैं सो रहा था, तभी अचानक धडाम से आवाज आई। मैं बाहर निकल कर देखा तो एक कार पर हाइवा चढ़ा था। और दोनों गाड़ियां कई झोपड़ियों पर चढ़ी थी। जैसे ही मैंने बाहर निकल कर देखा तो कार में लाशें बिछीं थी। किसी का सिर कटा था, तो किसी के शरीर से सिर्फ खून ही खून बह रहा था। घटना के आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। प्रत्यक्षदर्शी जोगिंदर मलिक ने बताया, मैं चाय लेकर घर आया था। चाय पी ही रहा था, तभी झोपड़ी टूटने की आवाज आई। मैं बाहर निकल कर देखा तो करीब 4-5 झोपड़ियां टूट गई थी। एक कार पूरी झोपड़ियों पर चढ़ गई थी। घटना में मुझे सिर में चोट लगी है।



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