जिले के ग्राम राड़ेप में गुरुवार को भाईदूज के अवसर पर पारंपरिक लट्ठमार होली का आयोजन किया गया। शाम करीब पांच बजे शुरू हुए इस आयोजन में गांव की गलियां रंग-गुलाल से सराबोर हो गईं और पूरे माहौल में हंसी-ठिठोली, ढोल-नगाड़ों और फाग गीतों की गूंज सुनाई दी। इस लट्ठमार होली के दौरान महिलाओं ने हाथों में लाठियां लेकर पुरुषों पर प्रहार किए। पुरुष ढाल लेकर अपना बचाव करते हुए दिखाई दिए। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए और पूरे आयोजन का आनंद लिया। परंपरा के अनुसार, मैदान के बीच में गुड़ की एक पोटली रखी जाती है। पुरुषों के समूह इस पोटली को पाने के लिए आगे बढ़ते हैं, जबकि महिलाएं डंडों से उनकी राह रोकती हैं। पुरुष ढाल की मदद से खुद को बचाते हुए पोटली तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। इस रोचक परंपरा के दौरान हंसी-मजाक और ठिठोली का माहौल बना रहता है। आयोजन के दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप पर फाग गीत गाए गए, जिस पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया। बुजुर्ग भी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर उत्सव का हिस्सा बने। बरसाना और नंदगांव से जुड़ी परंपरा लट्ठमार होली की यह परंपरा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरसाना और नंदगांव से जुड़ी है, जहां इसे राधा-कृष्ण की लीलाओं की स्मृति में मनाया जाता है। इसी परंपरा से प्रेरित होकर ग्राम राड़ेप में भी ग्रामीण इस अनोखे अंदाज में होली खेलते हैं। गांव के जिम्मेदार लोगों ने आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखी, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस पर्व ने गांव में आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश दिया और पूरा ग्राम राड़ेप उत्सव के रंग में रंग गया।
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