मुख्य बातें

कैथल में पूर्व डिप्टी सिविल सर्जन-पति पर आरोप तय: जजों के फर्जी हस्ताक्षर से कोर्ट अटेंडेंस सर्टिफिकेट बनाए, TADA क्लेम करने का मामला – Kaithal News

कैथल में पूर्व डिप्टी सिविल सर्जन-पति पर आरोप तय:  जजों के फर्जी हस्ताक्षर से कोर्ट अटेंडेंस सर्टिफिकेट बनाए, TADA क्लेम करने का मामला – Kaithal News

कैथल जिले की अदालत में डॉक्टर दंपती से जुड़े बहुचर्चित फर्जीवाड़ा मामले में अहम सुनवाई हुई है। कोर्ट ने पुलिस चालान के आधार पर पूर्व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नीलम कक्कड़ और उनके पति डॉ. भारत भूषण कक्कड़ के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। दोनों पर सरकारी ड्यूटी के दौरान जजों के फर्जी हस्ताक्षर कर कोर्ट के फर्जी अटेंडेंस सर्टिफिकेट बनाकर टीएडीए (TADA) क्लेम करने का आरोप है। बता दें कि डॉ. नीलम कक्कड़ कैथल में डिप्टी सिविल सर्जन के पद पर रह चुकी हैं, जबकि उनके पति डॉ. भारत भूषण कक्कड़ नागरिक अस्पताल में सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत रहे हैं। आरोप है कि दोनों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उनसे आर्थिक लाभ उठाया। आरटीआई से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा इस मामले का खुलासा गांव रसूलपुर निवासी जयपाल ने आरटीआई के माध्यम से किया था। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर पूरे प्रकरण की जानकारी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने जांच कर मामला दर्ज किया था, फिलहाल दोनों आरोपी हाईकोर्ट से जमानत पर हैं। पुलिस ने अपनी जांच के बाद जिला अदालत में दोनों के खिलाफ चालान पेश किया। शिकायतकर्ता के पक्ष से कोर्ट में अजय कुमार गुप्ता और अर्पित गुप्ता ने पैरवी की, अब तक हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने दस्तावेजों का अवलोकन कर पाया कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसके चलते कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत आरोप तय कर दिए। 16 जुलाई को होगी अगली सुनवाई अदालत में दोनों आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और ट्रायल की मांग की। इसके बाद न्यायालय ने मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। अब इस केस में अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें अभियोजन पक्ष अपने गवाह पेश करेगा। मामले की सुनवाई ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMIC) कैथल माधव मित्तल की अदालत में हुई। अब आगे की कार्यवाही गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर होगी, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। फर्जी कोर्ट सर्टिफिकेट्स का इस्तेमाल किया जब 2003 में डॉक्टरों का कैथल से गुरुग्राम तबादला हुआ, तो उन्होंने जॉइन करने के बजाय फर्जी कोर्ट सर्टिफिकेट्स का इस्तेमाल किया। 2020 में शिकायत मिलने पर जब जांच शुरू हुई, तो पाया गया कि आरोपी डॉक्टर 2017 और 2021 में सेवानिवृत्त होने के बाद कैथल के सरकारी अस्पताल में कंसल्टेंट के रूप में काम कर रहे थे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *