मुख्य बातें

कैंप में केवल स्टूडेंट्स को बुलाता, मरीज नहीं रहते थे: KGMU में फर्जी डॉक्टर हार्ट-टीबी स्पेशलिस्ट बनता था, लखनऊ में कई कॉन्टैक्ट बनाए – Lucknow News

कैंप में केवल स्टूडेंट्स को बुलाता, मरीज नहीं रहते थे:  KGMU में फर्जी डॉक्टर हार्ट-टीबी स्पेशलिस्ट बनता था, लखनऊ में कई कॉन्टैक्ट बनाए – Lucknow News


KGMU में 12वीं पास फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद से जुड़ा पुराना वीडियो सामने आया है। उसमें हस्साम अहमद खुद को डॉक्टर की तरह प्रेजेंट करते हुए टीबी से बचाव को लेकर जागरूक कर रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि वह हार्ट के अलावा के

.

हस्साम अहमद से कनेक्शन को लेकर DM कार्डियोलॉजी के जिस डॉक्टर का नाम आया था, उसकी तरफ से भी इस मामले सफाई आई है। उसकी तरफ से कहा गया है कि आज तक वह कभी हस्साम अहमद से नहीं मिला और न ही उसका परिचित है।

यह उस वीडियो क्लिप की GIF है जिसमें फर्जी डॉक्टर टीबी के बारे में जागरूक कर रहा है।

मुरादाबाद का रहने वाला है हस्साम का साथी फैक

KGMU से मिली जानकारी के अनुसार, हस्साम अहमद की NGO ‘कार्डियो सेवा’ का को-फाउंडर कैफ अहमद मंसूरी है। वह मूलतः मुरादाबाद का रहने वाला है। LARI में कोर्स करने के दौरान ही उसने कुछ प्राइवेट क्लीनिकों में काम करना चालू कर दिया था। इसी दौरान उसकी पहचान कई निजी अस्पतालों और आसपास के डॉक्टरों से होने लगी। चंद सालों में उसने लखनऊ के कई डॉक्टरों से संपर्क बना लिया था।

कैंप में डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट्स ज्यादा रहते

हस्साम अहमद द्वारा लगाए जाने वाले मेडिकल कैंप में एक और बात सामने आई है। इन कैंप में मरीजों और तीमारदारों की संख्या न के बराबर रहती थी पर कैंप में डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स की बड़ी संख्या रहती थी। यहां तक कि बड़े पैमाने पर दवाइयों का भी भंडार मौजूद रहता था। साथ ही मेडिकल इक्विपमेंट की भी मौजूदगी रहती थी। मकसद मेडिकल कैंप को बड़ा और भव्य दिखाकर MBBS स्टूडेंट्स पर प्रभाव डालना रहता था।

21 अप्रैल को KGMU प्रशासन ने हस्साम अहमद को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया था।

21 अप्रैल को KGMU प्रशासन ने हस्साम अहमद को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया था।

20 अप्रैल को पुराने लखनऊ के एक मेडिकल कैंप में डॉ. केके सिंह गए थे। वहां मौके पर उन्हें बड़ी संख्या में फीमेल MBBS और पैरामेडिक्स के स्टूडेंट्स दिखे। सबसे परेशान करने वाली बात ये थी कि सभी मेडिकल कैंप के जरिए मरीजों की देखभाल करने की बात तो जरूर करते थे पर मौके पर मरीजों की संख्या न के बराबर रही।

LARI के अलावा कई अन्य विभागों में थी गहरी पैठ

KGMU के LARI कार्डियोलॉजी में हस्साम अहमद के कई कनेक्शन होने की बात सामने आने के बाद से उसकी और विभागों में भी पैठ की बात सामने आ रही हैं। वर्ल्ड टीबी डे पर जारी किए गए एक वीडियो में हस्साम अहमद लोगों को टीबी को लेकर जागरुक करता दिख रहा है। ऐसे में आशंका ये भी हैं कि रेस्पिरेटरी मेडिसिन और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में भी उसके गहरे लिंक्स हो। ऐसा कहा जा रहा कि इन वीडियोज को हिन्दू फीमेल मेडिकल स्टूडेंट्स को दिखाकर हस्साम मेडिकल कैंप में लाने का प्रयास करता था।

जांच में सामने आया कि छात्राओं को दिए गए लेटर पर हस्साम अहमद ने KGMU के प्रवक्ता केके सिंह के फर्जी हस्ताक्षर किए थे।

जांच में सामने आया कि छात्राओं को दिए गए लेटर पर हस्साम अहमद ने KGMU के प्रवक्ता केके सिंह के फर्जी हस्ताक्षर किए थे।

गहनता से जांच करने पर दिया जा रहा जोर

शुरुआती जांच में जहां केवल फर्जी डिग्री और पहचान के सहारे मरीजों के इलाज का मामला सामने आया था। यह मामला एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग से डीएम कर चुके डॉक्टर का नाम सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई है। संबंधित डॉक्टर लंबे समय तक KGMU परिसर से जुड़ा रहा है।

उसके कई संपर्क संस्थान के भीतर और बाहर दोनों जगह सक्रिय रहे हैं। जांच टीम अब उसके पुराने रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, सोशल नेटवर्क, पेशेवर गतिविधियां और फाउंडेशन से जुड़ने होने की बारीकी से जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या उसने किसी स्तर पर फर्जी डॉक्टरों को संरक्षण या मार्गदर्शन दिया था।

अंदर के किसी डॉक्टर के मिले होंने की जांच जारी

KGMU प्रवक्ता और डीन डॉ. केके सिंह कहते हैं कि इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक स्तर पर जांच शुरू कर दी है। कैंपस से जुड़े सभी संदिग्ध लिंक, पुराने रजिस्ट्रेशन और एकेडमिक रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है। यह भी जांचा जा रहा है कि कहीं संस्थान की प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की चूक या लापरवाही तो नहीं हुई, जिसका फायदा उठाकर फर्जी डॉक्टर सक्रिय हो सके।

हस्साम अहमद ने फर्जी हस्ताक्षर से 27 अप्रैल को एम्स दिल्ली जाने के लिए 8 स्टूडेंट्स की लिस्ट का लेटर जारी किया था।

हस्साम अहमद ने फर्जी हस्ताक्षर से 27 अप्रैल को एम्स दिल्ली जाने के लिए 8 स्टूडेंट्स की लिस्ट का लेटर जारी किया था।

कार्डियोलॉजिस्ट ने कैंप में जाने की बात को किया खारिज

वहीं, इस मामले में KGMU में DM कार्डियोलॉजी करने वाले डॉ.अहमद तनवीर का बयान भी सामने आया हैं। डॉ. अहमद ने बताया कि वह कभी भी हस्साम अहमद के कार्डियक सेवा संस्था के कैंप में नहीं गए, ना ही वह फर्जी डॉक्टर को जानते है। डॉ. अहमद के मुताबिक करीब 2 महीने पहले एक फैक अहमद मंसूरी नामक युवक मेरी क्लिनिक में काम मांगने आया था। वह लारी से टेक्नीशियन का कोर्स पूरा किया था। चूंकि, मैं भी लारी का पढ़ा हुआ हूं, इसलिए उसको मैंने पार्टटाइम पर रख लिया था।

मेरे यहां पहले से दो टेक्नीशियन काम करते है। वह शाम को 2-3 घंटे के लिए आता था। उसकी मुझसे कोई विशेष बातचीत भी नहीं थी। प्रोफेशनल तरीके से उससे काम लिया गया, उसकी निजी जिन्दगी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बहुत जल्द मैं KGMU प्रशासन से मिलकर उन तक भी जरूर अपना पक्ष रखूंगा।

——————————

संबंधित खबर भी पढ़िए-

KGMU के कई डिपार्टमेंट में फर्जी डॉक्टर की गहरी पैठ : 2 सहयोगी के नाम सामने आए, LARI कार्डियोलॉजी में करते थे ब्रेनवॉश

KGMU में पकड़े गए 12वीं पास फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद की जड़ें कैंपस के कई विभागों तक फैली हैं। लारी कार्डियोलॉजी में उसकी सबसे ज्यादा पकड़ थी। यहीं के एक फैक अहमद मंसूरी नाम के कार्डियक टेक्नीशियन को कार्डियो सेवा फाउंडेशन का को-फाउंडर भी बताया जा रहा है। (पूरी खबर पढ़िए)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *