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48 लग्जरी कारों का फर्जी एक्सीडेंट: मर्सिडीज-फॉर्च्यूनर निशाने पर, कई बडे़ ऑफिसर शामिल, जानें- कैसे हुआ खुलासा – Rajasthan News




राजस्थान में मर्सिडीज-फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी कारों का फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर, बीमा क्लेम उठाने का खेल सामने आया है। ये खेल 3 साल से चल रहा था। कुल 48 कारों का बीमा लिया गया है। बीमा कंपनी के छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी इस खेल में शामिल थे। इनका तरीका भी ऐसा हैरान करने वाला था कि कार के असली मालिकों तक को भनक नहीं लगने दी। जब बीमा कंपनी ने एक ही जिले में लगातार क्लेम के बढ़ते केस देखे तो मामला CBI जांच तक पहुंचा। CBI ने जांच के बाद हाल ही में FIR दर्ज की है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- कैसे मामले का खुलासा हुआ? कैसे यह खेल खेला गया? यूं हुआ खुलासा और ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा CBI को सूचना मिली कि सीकर, चूरू, सुजानगढ़, झुंझुनूं और नागौर में वाहनों पर फर्जी क्लेम उठाए जा रहे हैं। इसके बाद CBI ने राजस्थान ACB को भी कार्रवाई में शामिल कर लिया। दोनों एजेंसियों की संयुक्त टीमों ने 1 सितंबर 2025 को सीकर में न्यू इंडिया एश्योरेंस कम्पनी के ऑफिस पर रेड की। जांच में पाया कि 2019 से 2022 तक कंपनी के दफ्तर में शामिल बड़े अधिकारियों से लेकर कर्मचारी, कार वर्कशॉप और कुछ अज्ञात आरोपियों ने फर्जीवाड़ा किया। लग्जरी कारों के फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर लाखों रुपए के क्लेम वाहन मालिकों के बजाय दूसरे लोगों के खातों में जमा हुए। इन दो केस स्टडी से समझें फर्जी क्लेम का खेल केस – 1 : सर्विस के लिए आई कार, चुटकियों में बदली मालिक की डिटेल चूरू में एक शख्स ने मार्च 2022 में अपनी सुपर लग्जरी कार को सर्विस के लिए श्री गंगा व्हीकल्स वर्कशॉप पर दी। वर्कशॉप के इंचार्ज और मैनेजरों की नजर जब गाड़ी पर गई, तो फर्जी क्लेम का प्लान बना। गाड़ी सर्विस के बाद लौटा दी। अगले ही दिन वर्करों ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को बताया कि एक लग्जरी कार है, जो एकदम नई है और मोटा क्लेम उठाया जा सकता है। साजिश होने लगी और गाड़ी का फर्जी एक्सीडेंट बताते हुए फर्जी कागजात बनाने का सिलसिला शुरू हो गया। क्लेम के कागजों में असली मालिक की जगह दूसरा शख्स पवन जांगिड़ की डिटेल डाली गई। मोबाइल नंबर भी बदल दिए। मिलीभगत के कारण कुछ ही दिन में 6 लाख 17 हजार से ज्यादा का क्लेम पवन जांगिड़ के खाते में जमा हो गया। केस-2 : नई फॉर्च्यूनर कार का एक्सीडेंट दिखाया सीकर की श्री कृष्ण फोरव्हील्स वर्कशॉप पर सितंबर 2020 को एक नई फॉर्च्यूनर कार सर्विस के लिए पहुंची। सर्विस के बाद वर्कशॉप के मैनेजर और बीमा कंपनी के अधिकारी सक्रिय हो गए।असली मालिक को हटाकर सुमीता नाम की एक महिला को उसका मालिक बना दिया गया। क्लेम फॉर्म में सुमीता के मोबाइल नंबर, चेक और खाते की डिटेल भरी गई। कुछ ही दिन में 5 लाख 85 हजार से ज्यादा का क्लेम पास होकर सुमीता के खाते में पहुंच गया। फिर आपस में इस पैसे की बंदरबांट हुई। सर्विस पर आने वाली लग्जरी कारों पर रखते थे नजर सजिश में शामिल कार वर्कशॉप वाले सर्विस पर या अन्य काम करवाने के लिए आने वाली उन गाड़ियों पर नजर रखते थे, जो उनके पास पहले से डैमेज कार की कंपनी (ब्रांड), रंग आदि से मैच कर रही हों। मर्सिडीड जैसी लग्जरी कारें इनकी निशाने पर होती थी। फिर उन कारों की डिटेल बीमा कंपनी के गैंग में शामिल अधिकारी-कर्मचारियों के जरिए निकाली जाती। गिरोह में शामिल किसी व्यक्ति को उस कार का डमी मालिक बनाते। कागजों में फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर क्लेम फाइल किया जाता। बीमा क्लेम देने के लिए कंपनियां कई OTP भेजती हैं, लेकिन ये OTP असली कार मालिक के बजाय डमी मालिकों के पास पहुंचते थे। कुछ ही दिनों में क्लेम अप्रूव होकर डमी मालिकों के खाते में ट्रांसफर हो जाता। ठगी का पैसा किराए के खातों में CBI को आशंका है कि आरोपी क्लेम उठाने के लिए बैंक के म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल करते थे। म्यूल अकाउंट का उपोयग साइबर अपराधी भी करते हैं। यह खाता किसी अनजान व्यक्ति के नाम पर होता है, जिसे लालच देकर या झांसे में लेकर अपराधी इस्तेमाल करते हैं। 4 साल में 48 कारों का क्लेम उठाया चौंकाने वाली बात ये है कि यह खेल 4 साल से (2022 से) चल रहा था। धीरे-धीरे कर 48 लग्जरी कारों का 1 करोड़ से अधिक का क्लेम उठा लिया गया। इंश्योरेंस कंपनी को अपनी ऑडिट में तब शक हुआ, जब देखने में आया कि एक ही कार का एक ही साल में 3-3 बार एक्सीडेंट हुआ और उसका फुल क्लेम लिया गया है। दो साल में लगातार दो से तीन बार तक क्लेम उठाए 2 साल के अंदर गाड़ियों का 2-2 और 3-3 बार तक एक्सीडेंट्स बताए और फर्जी क्लेम उठाए। CBI ने जांच में पाया कि रूप हुड्डा के नाम से 2021 में 2 बार 2-2 लाख से ज्यादा का और 2022 में फिर करीब 2 लाख का और क्लेम उठाया। वहीं, सुभाष सामरिया और मोहम्मद के नाम से 2021 और 2022 में दो-दो बार लाखों का क्लेम उठाया गया। CBI सूत्रों के मुताबिक अब खातों के जरिए उन लोगों तक पहुंचा जाएगा, जिन्होंने ये फर्जी क्लेम उठाया है। CBI की FIR में 17 नामजद आरोपी, कार वर्कशॉप के कर्मचारी भी जिम्मेदार जांच करने के बाद CBI ने इस मामले में पिछले हफ्ते 17 अप्रैल को 3 अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। इसमें न्यू इंडिया एश्योरेंस के दो सीनियर डिविजनल मैनेजर, एक मैनेजर, एक डिप्टी मैनेजर के भी नाम हैं। वहीं, 4 असिस्टेंट मैनेजर, 3 प्रशासनिक अधिकारी, एक सीनियर असिस्टेंट को नामजद किया है। सभी आरोपी न्यू इंडिया एश्योरेंस के सीकर ऑफिस में पोस्टेड रहे। दो सर्वेयर, कार वर्कशॉप के जीएम, मैनेजर और इंचार्ज तक कुल 17 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। CBI ने माना है कि सभी ने मिलकर वाहन मालिकों के बजाय साजिश में शामिल लोगों के खातों में लाखों रुपए के क्लेम की राशि ट्रांसफर करवाई। CBI ने पाया कि 1 करोड़ 23 लाख रुपए के 48 फर्जी क्लेम उठाए गए। CBI जांच के बाद 17 मार्च को FIR दर्ज कर ली है, जिसमें डेढ़ दर्जन आरोपी नामजद हैं। सूत्रों के मुताबिक ऐसे क्लेम उठाने वालों की संख्या भी और अधिक हो सकती है।



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