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हाईकोर्ट के आसपास जाम की स्थिति से बचने के लिए कई प्लान बने लेकिन लागू नहीं हो पाए। हाईकोर्ट से भी केवल निर्देश-आदेश आते रह गए। पीडब्ल्यूडी, एलडीए, लखनऊ मेट्रो, नगर निगम के अधिकारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। बार-बार कहने के बाद अब इस क्रम में कोई आगे बढ़ा तो वह है लखनऊ ट्रैफिक पुलिस। ट्रैफिक पुलिस ने कमता पर बैरिकेडिंग कर दी। इससे हुआ यह कि पॉलिटेक्निक की ओर से आने वाले लोग कमता से फ्लाईओवर के नीचे यू-टर्न नहीं ले पाएंगे। इस व्यवस्था से इंदिरानगर सेक्टर-11, 11 तकरोही की तरफ से आने वाली करीब डेढ़ लाख की आबादी बेवजह 5 किमी अतिरिक्त घूम रही है। इस समय बदली ट्रैफिक व्यवस्था से लोग परेशान हो रहे हैं। हमने इलाके के लोगों से इस बारे में बात कर जानना चाहा कि कमता के आसपास की नई व्यवस्था से कितनी फायदा हुआ? …तो लोगों ने फायदा नहीं बल्कि समस्याओं की झड़ी लगा दी। ज्यादातर ने यही कहा कि पॉलिटेक्निक से कमता तक में एक कट तो दे देते। घर से लोहिया हॉस्पिटल केवल 500 मीटर दूर है लेकिन नई व्यवस्था ने उसे 4 km दूर कर दिया। पॉलिटेक्निक चौराहे की तरफ से आने वाले ट्रैफिक में शहर के लोग भी होते हैं। उन्हें जरूरी काम से जाना होता है। उन्हें राहत देने के लिए सुषमा हॉस्पिटल के आसपास कट देना होगा जिससे अयोध्या रोड का ट्रैफिक कम हो सके। पहले 4 तस्वीरें देखिए- अब पढ़िए लोगों की बात- 10 मिनट का सफर 30 मिनट का करा दिया अनिल कुमार पांडेय पटरी दुकानदार संघ से जुड़े हैं। उनका कहना है कि कमता पर जो नया डायवर्जन लागू किया गया है, उससे लोगों को काफी परेशान है। इस इलाके में 1.50 लाख से ज्यादा की आबादी रहती है। जिसे काफी घूमते हुए जाना पड़ता है। पॉलिटेक्निक से कलेवा होते हुए लोग पहुंचते हैं। इंदिरानगर सेक्टर-11, तकरोही, सेक्टर-13 और अन्य जगहों पर रहने वाले लोग पहले सुषमा अस्पताल कट आते हैं। फिर कमता तिराहे पर जाकर जाम में फंसते हैं। इसके बाद पॉलिटेक्निक की तरफ यू-टर्न लेकर जाना होता है। लखनऊ के कई प्रमुख चौराहों की यही स्थिति कर दी गई है। 10 मिनट का सफर 30 मिनट में पूरा हो रहा। 5 किलोमीटर की रनिंग भी बढ़ रही। सुषमा कट खुल जाए तो कमता पर लोड कम हो पूर्व पार्षद स्माइलगंज रुद्र प्रताप सिंह का कहना है कि कमता पर डायवर्जन होने से इलाके की सवा लाख आबादी पर सीधा असर पड़ रहा है। लाखों लोगों के जाने का एकमात्र रास्ता कमता है, जहां डायवर्जन करने से लोगों का समय खराब हो रहा है। अगर किसी को निशातगंज, हजरतगंज या कहीं भी जाना हो, कमता से यू-टर्न करना पड़ता है। उसके एवज में अगर सुषमा अस्पताल के पास वाला कट खोल दिया तो लोगों को बहुत राहत होगी। लोग जो एक से डेढ़ किलोमीटर फालतू सफर करते हैं, वो बचेगा। इसके साथ ही कमता से यू-टर्न लेकर पॉलिटेक्निक आने वाला ट्रैफिक कम हो जाएगा। वो सुषमा अस्पताल कट से ही निकल जाएगा। बाराबंकी से आते हैं तो पहले पॉलिटेक्निक जाते हैं जाम में फंसने के बाद मंगलपुरी के वेद प्रकाश शुक्ला ने बताया कि उन्हें घर से कहीं भी जाना हो तो कमता जरूर जाना पड़ता है। इससे काफी समय बर्बाद होता है। उनका मानना है कि डायवर्जन करें लेकिन रोड मैप तैयार करने के साथ स्थानीय लोगों से भी बात करनी चाहिए। कई बार अच्छी सलाह मिल जाती है। 10 से ज्यादा कॉलोनी के लोग सुषमा कट का इस्तेमाल करते हैं। बाराबंकी-चिनहट से आने वाली आबादी सुषमा से घूम जाती थी। अब पॉलिटेक्निक चौराहे पर जाम में फंसने के बाद यू-टर्न लेकर अपने घर को जाते हैं। इस कट को खोलकर चेक करें। अब पढ़िए हाईकोर्ट की बात- हाईकोर्ट ने कहा- लोग परेशान, समाधान क्यों नहीं निकाला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पॉलीटेक्निक चौराहे से किसान पथ तक लगातार बढ़ रही ट्रैफिक जाम की समस्या पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर अगली सुनवाई पर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 मई को निर्धारित की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने सूरज सिंह बिसेन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि इस मार्ग पर वर्षों से जाम की समस्या बनी हुई है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अब तक इसका कोई प्रभावी समाधान नहीं निकाला जा सका है। कार्ययोजना संतोषजनक न होने पर जिम्मेदारी तय होगी न्यायालय ने पुलिस उपायुक्त (यातायात), पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) और नगर निगम के एक राजपत्रित अधिकारी को तलब किया है। इन अधिकारियों को पूरे मार्ग का स्थलीय निरीक्षण करने, जाम के कारणों की पहचान करने और व्यावहारिक समाधान तैयार करने को कहा गया है। खंडपीठ ने यह भी कहा कि इस मामले पर पहले भी कई जनहित याचिकाओं में सुनवाई हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी संतोषजनक कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं की गई तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि खराब ट्रैफिक प्रबंधन, अव्यवस्थित सड़क व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण रोजाना हजारों लोगों को जाम से जूझना पड़ रहा है। —————————— संबंधित खबर भी पढ़िए- पॉलिटेक्निक से चिनहट तक कन्फ्यूज करती रहीं बैरिकेडिंग : दिनभर रेंगे वाहन, 6 लेयर में कतारें; कमता चौराहा से सीधे शहीद पथ का रास्ता बंद लखनऊ में हाईकोर्ट के पास जाम की स्थिति हटाने के लिए ट्रैफिक और लखनऊ पुलिस एक्टिव है। कमता पर बैरिकेडिंग कर पॉलिटेक्निक की ओर से आने वाले वाहनों को कमता के तीसरे अंडरपास से यूटर्न लेकर आना होगा। (पूरी खबर पढ़िए)
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