जमुई के खैरा प्रखंड में स्थित नरियाना और मांगोबंदर पुल की जर्जर स्थिति के कारण प्रशासन ने उस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। दो दिन पहले लगाए गए इस प्रतिबंध के बाद पुल से सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन बंद हो गया है। पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग-रेलिंग लगाई पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग और लोहे की रेलिंग लगाई गई है, जिससे बड़े, भारी, तीनपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। इस कदम से आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रोजमर्रा के कामकाज, बाजार, अस्पताल और स्कूल-कॉलेज जाने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। ग्रामीणों को अब पुल पार करने के लिए पैदल चलना पड़ रहा है। कई लोग अपनी बाइक को हाथ से धकेलकर पार करते दिख रहे हैं, जबकि महिलाएं और बुजुर्ग सिर तथा कंधों पर सामान ढोकर किसी तरह पुल पार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बंद होने से खैरा, नरियाना, मांगोबंदर और आसपास के दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। पहले लोग इसी रास्ते से कम समय में जमुई और सोनो पहुंच जाते थे, लेकिन अब उन्हें लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। छोटे व्यापारियों और किसानों को भी बाजार तक सामान पहुंचाने में दिक्कत हो रही है।यह सड़क झारखंड और पश्चिम बंगाल जाने वाले वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण शॉर्टकट मार्ग मानी जाती थी। पुल बंद होने के बाद अब वाहनों का दबाव अन्य मार्गों पर बढ़ गया है।ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से पुल की मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती रही। ऊपर से गड्ढे भर दिए जाते थे, लेकिन पुल की नींव और निचला हिस्सा लगातार कमजोर होता गया। अब हालात ऐसे हैं कि लोगों को हर समय पुल ध्वस्त होने का डर बना रहता है। उनका कहना है कि केवल बैरिकेडिंग लगाकर आवाजाही रोकना समस्या का स्थायी हल नहीं है; जब तक नए पुल का निर्माण नहीं होगा, हजारों लोगों की परेशानी बनी रहेगी। पुल पर आवागमन बंद होने के कारण कई वाहन चालक अब नदी पार करने को मजबूर हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर खतरे और दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहा है।
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