मुख्य बातें

30 की उम्र के बाद मां बनना हो रहा मुश्किल: खराब लाइफस्टाइल बिगाड़ रही हार्मोन का बैलेंस; डॉ. सीमा बोलीं-IVF भी 100% सफल नहीं – Kanpur News

30 की उम्र के बाद मां बनना हो रहा मुश्किल:  खराब लाइफस्टाइल बिगाड़ रही हार्मोन का बैलेंस; डॉ. सीमा बोलीं-IVF भी 100% सफल नहीं – Kanpur News

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और करियर की होड़ में महिलाएं फैमिली प्लानिंग में देरी कर रही हैं, लेकिन यह देरी उनकी कोख पर भारी पड़ रही है। जच्चा-बच्चा अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा द्विवेदी के अनुसार, महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने और बार-बार होने वाले गर्भपात (Miscarriage) का सबसे बड़ा कारण हार्मोनल असंतुलन है। हार्मोन का बिगड़ा तालमेल सबसे बड़ी बाधा डॉ. सीमा द्विवेदी का कहना है कि शरीर में हार्मोन्स का संतुलन ही गर्भधारण की पहली सीढ़ी है। अगर यह संतुलन बिगड़ जाए, तो न केवल गर्भधारण करने में दिक्कत आती है, बल्कि गर्भ को सुरक्षित बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। आज की खराब जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतें और तनाव सीधे तौर पर हार्मोन्स को प्रभावित कर रहे हैं। इसका समाधान केवल दवाइयां नहीं, बल्कि एक अनुशासित जीवनशैली अपनाना और सही समय पर डॉक्टरी सलाह लेना है। समय रहते की गई जांच बड़े संकट को टाल सकती है। 30 की उम्र के बाद घटने लगती है अंडों की क्वालिटी मेडिकल सर्वे के आंकड़े बताते हैं,कि उम्र का असर प्रजनन क्षमता पर सीधा पड़ता है। डॉ. सीमा द्विवेदी के मुताबिक, जैसे ही महिला की उम्र 30 वर्ष के पार होती है, उसके अंडाशय में बनने वाले अंडों की गुणवत्ता और संख्या तेजी से गिरने लगती है। यही वजह है कि 30-35 की उम्र के बाद प्राकृतिक रूप से मां बनने की संभावना काफी कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में जब प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण संभव नहीं हो पाता, तब दंपत्तियों को IVF यानी कृत्रिम गर्भाधान का सहारा लेना पड़ता है। IVF महंगा इलाज और सफलता की अनिश्चितता बांझपन से जूझ रहे परिवारों के लिए IVF एक उम्मीद तो है, लेकिन इसकी राह बहुत कठिन है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसका खर्चीला होना है, जिसकी वजह से यह आम जनता की पहुंच से कोसों दूर है। इसके अलावा, भारी-भरकम रकम खर्च करने के बाद भी इसमें सफलता की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती। आंकड़ों के अनुसार, IVF की सफलता की दर महज 30 से 40 प्रतिशत ही है। यानी लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी कई बार परिणाम सकारात्मक नहीं आते।

सरकारी अस्पतालों में सुविधा की जरूरत
निजी सेंटर्स में होने वाले भारी खर्च को देखते हुए अब यह मांग उठने लगी है कि सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए। डॉ. सीमा द्विवेदी का सुझाव है कि अगर सरकार इस तरह की आधुनिक सुविधाओं को सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराए, तो उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो सिर्फ पैसों की कमी के कारण संतान सुख से वंचित रह जाते हैं। आम जनता तक इस तकनीक की पहुंच होना आज के समय की बड़ी जरूरत बन गई है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *