धर्मशाला नगर निगम चुनाव इस बार केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें 2027 के विधानसभा चुनावों के ‘सेमीफाइनल’ के तौर पर देखा जा रहा है। इस बार चुनावी मैदान में पारंपरिक नारों और रैलियों के साथ-साथ वैज्ञानिक डेटा और पेशेवर विश्लेषण का भी बोलबाला है। चुनावी बिसात को समझने के लिए भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों ने पहली बार पेशेवर डेटा कंपनियों और विशेषज्ञों की मदद ली है। ये टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं ताकि मतदाताओं के मूड को सटीक तरीके से समझा जा सके। इन कंपनियों की प्रारंभिक रिपोर्टों ने नेताओं की धड़कनें तेज कर दी हैं। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को बढ़त का संकेत विभिन्न वार्डों में सर्वे कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती रुझानों में कांग्रेस का पलड़ा थोड़ा भारी दिखाई दे रहा है। हालांकि, इसे अंतिम परिणाम मानना जल्दबाजी होगी क्योंकि भाजपा के मजबूत गढ़ों में अभी भी कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। पांच वार्डों में ‘कांटे की टक्कर’ सर्वेक्षण रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि धर्मशाला के पांच वार्डों में मुकाबला बहुत ही पेचीदा हो गया है। इन वार्डों में जीत-हार का अंतर मात्र कुछ वोटों का रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही पांच वार्ड निगम की सत्ता का भविष्य तय करेंगे। बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़ाई चिंता दोनों ही पार्टियों के लिए इस समय सबसे बड़ी सिरदर्दी बागी और निर्दलीय उम्मीदवार बने हुए हैं। सर्वे के मुताबिक, कम से कम तीन वार्ड ऐसे हैं जहाँ निर्दलीय प्रत्याशी अपनी पुरानी पार्टियों के आधिकारिक उम्मीदवारों का खेल बिगाड़ सकते हैं और सीधी टक्कर दे रहे हैं।
भीतरघात का डर सता रहा सियासी दलों को सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही खेमों में ‘भीतरघात’ की गहरी आशंका है। टिकट वितरण से नाराज कार्यकर्ता और स्थानीय नेता अंदरूनी तौर पर विरोध कर सकते हैं, जिससे आधिकारिक प्रत्याशियों की राह मुश्किल हो सकती है। पिछला गणित: बहुमत के बावजूद भाजपा ने गंवाई थी सत्ता पिछले निगम कार्यकाल का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। चुनाव के बाद भाजपा के पास 10 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस के पास केवल 3 और 4 निर्दलीय थे। शुरुआत के ढाई साल भाजपा का मेयर रहा, लेकिन जब मेयर पद महिला के लिए आरक्षित हुआ, तो कांग्रेस ने सियासी दांव-पेच से अपनी पार्षद को मेयर की कुर्सी पर बिठा दिया था। 2027 के विधानसभा चुनावों पर सीधा असर राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार के नतीजे केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेंगे। इन चुनावों के परिणामों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि धर्मशाला क्षेत्र में जनता का झुकाव किस तरफ है, जिसका सीधा मनोवैज्ञानिक लाभ 2027 के विधानसभा चुनावों में संबंधित पार्टी को मिलेगा। सत्ता की बिसात और जनता का फैसला फिलहाल, दोनों दल सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। उम्मीदवारों को डेटा के अनुसार प्रचार करने और रूठे हुए कार्यकर्ताओं को मनाने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना यह है कि डेटा और विश्लेषण के इस दौर में धर्मशाला की जनता किसके सिर पर जीत का ताज सजाती है।
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