मध्य प्रदेश के श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बुधवार को तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने न केवल नगर पालिका अध्यक्ष पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया, बल्कि सरकार के विरोधाभासी रवैये पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव (CS) को अधिकारियों के आचरण की जांच के आदेश भी दिए हैं। साथ ही कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्या है पूरा विवाद? (पार्षदों द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव)
श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग के निर्वाचन को सुमेर सिंह ने चुनौती दी थी। चुनाव न्यायाधिकरण ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि अध्यक्ष के निर्वाचन की अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) राजपत्र में प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए याचिका समय से पहले है। हाईकोर्ट का तर्क
जस्टिस आशीष श्रोती की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि 2020 के संशोधन के बाद अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है। ऐसे में अलग से गजट नोटिफिकेशन की अनिवार्यता के आधार पर किसी को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि अध्यक्ष का कार्यकाल पहली बैठक से शुरू होता है, इसलिए उसी दिन से चुनाव को चुनौती देने का अधिकार भी मिल जाता है। “अड़ंगा डालने वाली रणनीति” पर लगा जुर्माना
कोर्ट ने नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अध्यक्ष को भली-भांति पता था कि उनके चुनाव का कोई अलग गजट प्रकाशन नहीं हुआ है, फिर भी उन्होंने निचली अदालत में इसी आधार पर आपत्ति जताकर प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की। कोर्ट ने इसे ‘अड़ंगा डालने वाली रणनीति’ मानते हुए 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। इसमें से 50,000 रुपए याचिकाकर्ता सुमेर सिंह को और 50,000 रुपए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्योपुर में जमा करने होंगे। मुख्य सचिव को जांच के निर्देश
कोर्ट ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वे इस मामले में शामिल दोषी अधिकारियों के आचरण की जांच करें और 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करें। हाईकोर्ट ने ‘हार्मोनियस कंस्ट्रक्शन’ (सामंजस्यपूर्ण व्याख्या) के सिद्धांत का हवाला देते हुए निचली अदालत को आदेश दिया है कि वह इस चुनाव याचिका का निराकरण नवंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से करे।
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