लखनऊ जंक्शन पर वेटिंग लाउंज के पास स्थित जनआहार केंद्र के पीछे की छत गिरने के मामले को लेकर पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय से आई टीम ने शु्क्रवार को मौके का निरीक्षण किया। साथ में लखनऊ मंडल के डीआरएम और वरिष्ठ अधिकारियेां की टीम भी थी। इस मामले में टीम स्टेशन पर पूछताछ कर ही रही थी कि छत का शेष हिस्सा भी भरभरा कर गिर गया। घटना के समय कोई भी वहां नहीं था। अब इस मामले में मुख्यालय की टीम ने जांच शुरू कर दी है। डेढ़ घंटे तक जांच कर लौटी टीम
गोरखपुर स्थित मुख्यालय से पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख संरक्षा अधिकारी के साथ तीन सदस्यीय टीम शुक्रवार की सुबह लखनऊ जंक्शन पहुंची। लखनऊ मंडल के डीआरएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी आ गए। टीम ने पहले गिरी छत का निरीक्षण किया। उसके बाद घटनाक्रम को लेकर स्टेशन पर ही संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की। बताया जाता घटनास्थल से हट कर टीम जब पूछताछ कर रही थी तभी छत का शेष हिस्सा भी गिर गया। गोरखपुर की टीम निरीक्षण और जांच कर लगभग डेढ़ घंटे बाद लौट गई। उधर, डीआरएम और उनकी टीम काफी देर तक स्टेशन पर रुकी रही। घटनाक्रम को लेकर हर पहलुओं की जांच की। स्टेशन के अधिकारियों, निर्माण संस्था और कुछ रेलकर्मचारियों से भी पूछताछ की गई।
तोड़ने के दौरान सतर्कता नहीं बरती गई
जन आहार केंद्र के पीछे के हिस्से की जो छत गिरी है, वह भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका था। उसे तोड़ कर नए सिरे से बनाए जाने के लिए इसकी दीवार और खंभों को तोड़ा जा रहा था। बताया जाता है कि संबंधित ठेकेदार के श्रमिकों ने छत के खंभों को तोड़ने के दौरान विशेष सतर्कता नहीं बरती, जिसके कारण ही छत अचानक भरभरा कर गिर गई।
घटना के बाद से ही प्रतीक्षालय बंद
जन आहार केंद्र के भवन का जो हिस्सा गिरा है, उसके बगल में ही उच्च श्रेणी का महिला प्रतीक्षालय भी है। प्रतीक्षालय के पीछे स्थित वॉशरूम की छत भी गिरी छत से मिली हुई है। घटना के बाद से प्रतीक्षालय को बंद कर दिया गया है। हालांकि स्टेशन के अधिकारियों का कहना है कि तोड़फोड़ के कारण पहले से ही इस हिस्से को घेर कर बंद कर दिया गया था। घटना के समय प्रतीक्षालय में कोई नहीं था। स्टेशन के सूत्रों का कहना है कि गुरुवार शाम लगभग चार बजे जब छत गिरी तो कुछ यात्री प्रतीक्षालय में थे। गनीमत रहा कि उस दौरान कोई शौचालय की तरफ नहीं गया, नहीं तो चोटिल हो सकता था।
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