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पुरुषोत्तम मास में शुरू हुए विशेष सेवा-पूजा श्रृंगार: भीलवाड़ा के दुधाधारी गोपाल में मंदिर में हर दिन उत्सव,इसी माह में होली इसी में दीवाली – Bhilwara News

पुरुषोत्तम मास में शुरू हुए विशेष सेवा-पूजा श्रृंगार:  भीलवाड़ा के दुधाधारी गोपाल में मंदिर में हर दिन उत्सव,इसी माह में होली इसी में दीवाली – Bhilwara News

पुरुषोत्तम ( अधिक) मास के अवसर पर शहर के सांगानेरी गेट स्थित दूधाधारी मंदिर में धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला के तहत प्रतिदिन अलग-अलग मनोरथ सजाए जा रहे हैं साथ ही हर तिथि के मौके पर साल भर होने वाले आयोजनों को एक माह में मनाया जा रहा है । इनमे होली दीवाली रक्षाबंधन सहित सभी हिंदी पर्व और त्यौहार उत्सव के साथ मनाए जा रहे हैं। मंदिर परिसर में रंग बिरंगी सजावट इस मौके पर मंदिर का हर दिन अलग अलग आकर्षक श्रृंगार किया जा रहा है।ठाकुर जी के दर्शनों को बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ रही है।मंदिर में आकर्षक सजावट के साथ ठाकुर जी और प्रतिरूप को विराजित किया गया है।रंग-बिरंगी सजावट और भक्ति भरे माहौल के बीच श्रद्धालु दर्शन कर धर्मलाभ लेने पहुंच रहे हैं। विशेष धार्मिक आयोजन शुरू मंदिर के पुजारी कल्याण राय शर्मा ने बताया कि पुरुषोत्तम (अधिक) मास के दौरान प्रतिदिन विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। इनमें प्रातः मगला दर्शन, अभिषेक, तुलसी सहस्त्र अर्चन,हवन, श्रीमद्भागवत महापुराण कथा, पुरुषोत्तम माहात्म्य कथा, राजभोग,
उत्थापन, संध्या स्तुति, संकीर्तन एवं शयन दर्शन शामिल हैं। सभी त्यौंहार इस एक माह में भगवान का दिव्य पुरुषोत्तम मास प्रारंभ हो चुका है और हमारी निंबार्क की जो परंपरा है उसी के अनुरूप साल भर के जितने भी उत्सव और त्योहार हमारे सनातन धर्म में मनाया जाते हैं वो सभी इस पुरुषोत्तम मास में मनाए जाते हैं।जैसे प्रतिपदा को हमारे हिंदू सनातन धर्म में नव वर्ष मनाया जाता है घट स्थापना होती है। घट स्थापना से पुरुषोत्तम मास की शुरुआत नवरात्रि के प्रथम दिन घट स्थापना हुई,दूसरे दिन भगवान जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा का आयोजन हुआ।उसके बाद अक्षय तृतीया और गणेश चतुर्थी का आयोजन किया गया तो साल भर के जितने भी उत्सव और त्योहार हैं इस पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत मनाए जा रहे हैं और उसी के अनुरूप भगवान की पोशाक श्रृंगार इत्यादि किया जा रहा है। इसी महीने में दीवाली भी और होली भी जिस प्रकार हम पूरे वर्ष में अलग-अलग त्यौहार मनाते हैं,जैसे दीपावली आती है तो दीपावली मनाते हैं।उसी तरीके से इस माह में भी अमावस्या के दिन दीपदान होगा।ठाकुर जी को 56 भोग लगेगा, ठाकुर जी को 56 भोग का मनोरथ होगा।होली पर रंग आएगा ठाकुर जी होली खेलेंगे।बसंत पंचमी है तो गुलाल आता है तो जैसे हिंदू धर्म और रीति रिवाज के अनुसार त्यौहार मनाते हैं वैसे ही अधिक मास में त्यौहार मनाये जाते हैं। सुबह मंगला से शयन आरती तक होती है भक्ति अधिक मास में ठाकुर जी के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंच रहे हैं।सुबह मंगला आरती से शाम को शयन आरत तक सभी श्रृंगार में दर्शन होटें और भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर परिसर की आकर्षक साज सजावट की गई है। अलग अलग मनोरथ पर आकर्षक सजावट अलग-अलग मनोरथ के हिसाब से डेकोरेशन किया जाता है सुगंधित फूलों से ठाकुर जी का फूल बंगला बनाया जा गया है,पूरे महीने पुरुषोत्तम मास में होने वाले आयोजनों में भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ ठाकुर जी के दर्शन करने मंदिर पहुंच रहे हैं।



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