राजस्थान हाईकोर्ट ने बालोतरा जिले में खेत सुधार की आड़ में हो रहे कथित अवैध जिप्सम खनन के मामले में आदेश दिया है। कोर्ट ने पचपदरा तहसील के सात गांवों में नए जिप्सम परमिट जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति डॉ. नूपुर भाटी ने जनहित याचिका “सुमेर लाल शर्मा बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान” पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। जिन सात गांवों में नए परमिटों पर रोक लगाई गई है, उनमें वाजवास, भीमरलाई, सिणली जागीर, रिखरलाई, मेकरना, गोल और खार की ढाणी शामिल हैं। निरीक्षण रिपोर्ट में हुआ था अनियमितताओं का खुलासा याचिकाकर्ता सुमेर लाल शर्मा ने बताया- खान एवं भूविज्ञान विभाग उदयपुर के अतिरिक्त निदेशक (सतर्कता) धर्मेन्द्र लोहार द्वारा 24 अप्रैल 2026 को जारी निरीक्षण रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, 19 अप्रैल को भीमरलाई, वाजवास और खार की ढाणी क्षेत्र में जिप्सम परमिट स्थलों का निरीक्षण किया गया। इसमें पाया गया कि सतह से 3 मीटर की वैधानिक सीमा से अधिक गहराई तक खनन किया जा रहा था। कई स्थानों पर खनन की गहराई 6 मीटर तक पाई गई। इसके बाद संबंधित परमिट धारकों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि खेत सुधार के नाम पर जारी परमिटों की आड़ में बड़े स्तर पर जिप्सम का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है। इसमें जिला प्रशासन बालोतरा और खनिज विभाग बाड़मेर के अधिकारियों की मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया गया है। पर्यावरण को हो रहा नुकसान-ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अवैध खनन के कारण कृषि भूमि, पर्यावरण और भूजल स्तर को भारी नुकसान पहुंच रहा है। लगातार हो रहे गहरे खनन से खेत बर्बाद हो रहे हैं और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा नए परमिटों पर रोक लगाए जाने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विपुल सिंघवी, देवेन्द्रसिंह राठौड़, भावित शर्मा और ऋतुराज देवल ने पक्ष रखा, जबकि सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर विश्नोई ने दलीलें पेश कीं।
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