फतेहाबाद जिले के टोहाना डिस्ट्रीब्यूट्री पर वन विभाग की जमीन से 18 पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता नवजोत ढिल्लों की पीसीसीएफ पंचकूला को भेजी शिकायत के बाद डीएफओ राजेश कुमार ने टीम के साथ मौके का निरीक्षण किया। विभागीय जांच में सामने आया कि पेड़ बिना किसी अनुमति के काटे गए थे। मौके से लकड़ी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर डायल-112 बुलाकर पुलिस को सौंप दी गई। डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि यह जमीन वन विभाग और नहर विभाग की है, और कटे हुए पेड़ भी वन विभाग के थे। नगर परिषद अध्यक्ष नरेश बंसल के बेटे की संलिप्तता डीएफओ राजेश कुमार के अनुसार, कटाई में आरा संचालक के बेटे प्रिंस की लेबर और भाजपा नेता व नगर परिषद अध्यक्ष नरेश बंसल के बेटे दीपक बंसल की संलिप्तता पाई गई है। उन्होंने कहा कि लेबर, ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिक, आरा संचालक समेत अवैध काम में शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। वन विभाग भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 32 और 33 के तहत लकड़ी चोरी और अवैध कटान का मामला दर्ज करेगा। जब्त किए गए ट्रैक्टर को धारा 52 के तहत सीज कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, वन दरोगा सुरेंद्र सिंह से हाथापाई की कोशिश पर सरकारी काम में बाधा डालने और सरकारी संपत्ति की चोरी का मामला भी पुलिस में दर्ज कराया जा रहा है। दो-तीन घंटे में ही काटे 18 पेड़ डीएफओ ने स्पष्ट किया कि विभाग में कटाई के लिए कोई आवेदन लंबित नहीं था। आरोपियों के पास इलेक्ट्रिक आरी, ट्रैक्टर-ट्रॉली और कुशल लेबर थी। जिससे दो-तीन घंटे में ही 18 पेड़ काट दिए गए। विभाग अब अदालत में मामला दायर कर दोषियों को सजा दिलाएगा। पत्रकारों द्वारा विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाने पर, डीएफओ ने अपनी टीम का बचाव करते हुए कहा कि स्टाफ लगातार गश्त करता है और पेड़ इलेक्ट्रिक आरी से बहुत कम समय में काटे गए थे। हालांकि, समाजसेवी नवजोत ढिल्लों की टीम को विभाग को सूचना देनी पड़ी, जिससे गश्त पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वन दरोगा की ओर से थाने में शिकायत दी जा रही है। रेंज ऑफिसर और वन दरोगा पर मिलीभगत का आरोप शिकायतकर्ता नवजोत ढिल्लों ने पीसीसीएफ से दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रिंस चावला ने कहा अवैध कटाई कार्य वन विभाग के रेंज ऑफिसर और वन दरोगा की मिलीभगत से अन्य लोग करते है। रेंजर कभी कार्यालय में नही आता जिसके कार्यालय के सीसीटीवी चैक करवाने चाहिए। वन दरोगा खुद मिलकर ये पेड कटवाते है, जिला अधिकारी अपने कर्मचारियों को बचाने के चक्कर में उनके झूठे नाम बीच में ला रहे है।
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