कटिहार सदर अस्पताल में एम्बुलेंस के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। एक ही एम्बुलेंस में क्षमता से अधिक सात दिव्यांग बच्चों और उनके परिजनों को ले जाया गया। मीडिया में खबर आने के बाद जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट तलब की है। यह घटना राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) से जुड़ी है। एम्बुलेंस के क्षमता का किया गया उल्लंघन आजमनगर स्वास्थ्य केंद्र से सात दिव्यांग बच्चों को जांच के लिए सदर अस्पताल लाया जा रहा था। नियमों के अनुसार, एम्बुलेंस में केवल मरीज और एक सहायक को ही अनुमति होती है। हालांकि, इस एम्बुलेंस में बच्चों के साथ उनके कई परिजन भी सवार थे, जिससे क्षमता का स्पष्ट उल्लंघन हुआ। सूत्रों के अनुसार, एम्बुलेंस में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसके बाद यह मामला मीडिया में प्रमुखता से उठा। जिलाधिकारी ने तत्काल इसका संज्ञान लिया और सिविल सर्जन को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ होगी कार्रवाई जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एम्बुलेंस एक जीवनरक्षक सेवा है और इसका दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है। जांच के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस मामले में एम्बुलेंस चालक और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के प्रखंड समन्वयक की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। सिविल सर्जन ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। 102 और 108 एम्बुलेंस सेवा के प्रोटोकॉल के अनुसार, एक एम्बुलेंस में एक समय में एक गंभीर मरीज और एक परिजन ही बैठ सकता है। दिव्यांग बच्चों के मामले में भी बच्चों की संख्या और उम्र के हिसाब से एम्बुलेंस की व्यवस्था करनी होती है। क्षमता से अधिक सवारी ले जाना मोटर वाहन अधिनियम का भी उल्लंघन है।
डीएम ने सदर अस्पताल के उपाधीक्षक को भी निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो। सभी एम्बुलेंस के GPS और लॉगबुक की भी जांच होगी। दोषी पाए जाने पर चालक का लाइसेंस रद्द करने और एजेंसी पर जुर्माने की कार्रवाई संभव है।
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