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मैं बनूंगा CM से ‘जनता तय करेगी’ पर आए तेजस्वी: CM फेस पर राहुल का सपोर्ट नहीं, कांग्रेस हावी, क्यों बैकफुट पर आई RJD – Bihar News

मैं बनूंगा CM से ‘जनता तय करेगी’ पर आए तेजस्वी:  CM फेस पर राहुल का सपोर्ट नहीं, कांग्रेस हावी, क्यों बैकफुट पर आई RJD – Bihar News


ये दो बयान पढ़िए… पहला: ‘बिहार का अगला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोबारा नहीं होने जा रहे हैं, तेजस्वी यादव होने जा रहा है।’

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दूसरा: ‘हमारे गठबंधन में कोई कन्फ्यूजन नहीं है। और बिहार की मालिक जनता मुख्यमंत्री बनाती है। इस बार बदलाव चाहती है। आप बिहार के किसी भी व्यक्ति से पूछिए, सर्वे कराइए वो किसे देखना चाहते हैं। जवाब मिल जाएगा।’

दोनों बयान RJD लीडर तेजस्वी यादव के हैं। पहला 13 सितंबर को एक टीवी कार्यक्रम में और दूसरा 16 सितंबर को बिहार अधिकार यात्रा के दौरान दिया गया। दोनों में एक फर्क है। पहले तेजस्वी खुलकर कह रहे थे कि वही बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे। 16 सितंबर को उन्होंने पहली बार कहा, ’ बिहार की जनता मुख्यमंत्री तय करेगी’

यही बात राहुल गांधी, बिहार में कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और पार्टी के बाकी नेता कहते रहे हैं। तेजस्वी भी इस लाइन पर क्यों चले गए, क्या ये बयान पॉलिटिकल करेक्शन है, दैनिक भास्कर ने इस पर एक्सपर्ट्स और पार्टी नेताओं से बात की।

तेजस्वी यादव अभी बिहार अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं। फोटो 18 सितंबर की है, जब यात्रा खगड़िया पहुंची थी।

राहुल के एक बयान से CM फेस पर फंसा पेच महागठबंधन में शामिल RJD, VIP और भाकपा माले के नेता कह चुके हैं कि तेजस्वी ही CM फेस हैं। इनसे अलग बात राहुल ने कही। वोटर अधिकार यात्रा के दौरान तेजस्वी ने राहुल को प्रधानमंत्री पद के लिए चेहरा बताया, लेकिन 24 अगस्त को अररिया में राहुल से तेजस्वी को CM फेस घोषित करने के बारे में पूछा गया, तो वे गोलमोल जवाब दे गए।

राहुल ने कहा, ’हमारी बहुत अच्छे तरीके से पार्टनरशिप बनी है। सारी पार्टियां एक साथ जुड़कर काम कर रही हैं। कोई टेंशन नहीं है और म्यूचुअल रिस्पेक्ट है। एक-दूसरे की मदद हो रही है, तो मजा भी आ रहा है। आइडियोलॉजिकली और पॉलिटिकली हम अलाइंड हैं। बहुत अच्छा रिजल्ट आएगा।’

इसके बाद 10 सितंबर को कृष्णा अल्लावरू ने भी कहा कि बिहार का CM बिहार की जनता चुने तो बेहतर है।

तेजस्वी के बदले रुख के दो मायने… कांग्रेस की तरफ से क्लियर मैसेज न मिलने के बाद तेजस्वी ने दो काम किए। अपनी ताकत दिखाने के लिए 15 सितंबर को बिहार अधिकार यात्रा पर निकल गए। इससे पहले वे 17 अगस्त से 1 सितंबर तक वोटर अधिकार यात्रा में राहुल के साथ थे। इस पूरी यात्रा में राहुल गांधी ही छाए रहे।

एक्सपर्ट मानते हैं कि यात्रा से कांग्रेस को ज्यादा फायदा मिला। राहुल गांधी का कद तेजस्वी के मुकाबले बड़ा हो गया। यही वजह है कि तेजस्वी ने तय किया कि वे बिहार अधिकार यात्रा पर अकेले निकलेंगे। यात्रा में काफी भीड़ भी जुट रही है। तेजस्वी महागठबंधन की पार्टियों को दिखाना चाहते हैं कि बिहार में विपक्ष के सबसे बड़े नेता वही हैं।

CM कौन होगा, इसका जवाब जनता पर छोड़ा एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तेजस्वी महागठबंधन कोऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन हैं। वे बार-बार खुद को CM फेस बता रहे थे, लेकिन कांग्रेस इस मसले को टाल रही थी। इससे तेजस्वी की इमेज खराब हो रही थी। मैसेज जा रहा था कि तेजस्वी महागठबंधन की एकता के बजाय सिर्फ CM पद के बारे में सोच रहे हैं।

महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला भी तय नहीं हुआ है। कांग्रेस 70 और भाकपा माले 40 सीटें मांग रही हैं। VIP को 60 सीटों के साथ डिप्टी CM का पद भी चाहिए। इतने सारे पेच के बीच तेजस्वी लगातार बोल रहे थे कि वही बिहार के अगले CM होंगे।

पहले इसे उनका कॉन्फिडेंस माना गया। कांग्रेस नेताओं के बयान के बाद ये कॉन्फिडेंस, एरोगेंसी में बदलने लगा। इसलिए तेजस्वी ने तय रणनीति के साथ कहा कि बिहार की जनता मुख्यमंत्री तय करेगी।

राहुल के तीन फैसले-बयान, जिनसे RJD पर दबाव बना

1. लालू के करीबी अखिलेश प्रसाद को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने काफी वक्त तक बिहार कांग्रेस को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश की। श्री कृष्ण बाबू की जयंती पर कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में लालू प्रसाद ने तब के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के बारे में मंच से कहा कि मैंने ही सोनिया गांधी से पैरवी करके अखिलेश प्रसाद सिंह को पहली बार राज्यसभा भिजवाया था।

भूमिहार कम्युनिटी से आने वाले अखिलेश प्रसाद पर आरोप लगता था कि वे लालू प्रसाद की गुड बुक में शामिल हैं। लालू प्रसाद के बयान ने इसे पक्का कर दिया। राहुल ने मजबूत नेता होने के बावजूद अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया। प्रदेश प्रभारी मोहन राकेश को भी हटा दिया।

राहुल ने अखिलेश की जगह दलित कम्युनिटी से आने वाले राजेश राम को अध्यक्ष बनाया। मोहन राकेश की जगह अपने करीबी और बिहार से बाहर के नेता कृष्णा अल्लावरू को लाए।

2. नीतीश-तेजस्वी के जाति सर्वे को फर्जी बताया तेजस्वी यादव बिहार में हुए जातिगत सर्वे का क्रेडिट लेते रहे हैं। राहुल गांधी ने इस सर्वे को फर्जी बता दिया। 18 जनवरी, 2025 को पटना में संविधान सुरक्षा सम्मलेन में राहुल ने कहा, ‘देश की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए जाति जनगणना होनी चाहिए। यह बिहार में की गई फर्जी जाति जनगणना की तरह नहीं होगी।’

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जाति जनगणना के आधार पर नीति बनाई जानी चाहिए। कांग्रेस जाति जनगणना को लोकसभा और राज्यसभा में पारित करेगी। हम 50% आरक्षण की बाधा को खत्म कर देंगे।

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इसके अलावा एक मसला OBC वोट बैंक का भी है। OBC लालू प्रसाद यादव का कोर वोट बैंक रहे हैं। जुलाई 2025 में दिल्ली में कांग्रेस के भागीदारी न्याय सम्मेलन में राहुल ने OBC समुदाय से माफी मांगी और कहा, ‘मैं 2004 से राजनीति में हूं। पीछे देखता हूं तो पाता हूं कि आदिवासी, दलित, महिलाओं के मुद्दों पर मैंने सही काम किए, लेकिन OBC वर्ग को लेकर मुझसे और कांग्रेस से गलती हुई।’

‘OBC की चुनौतियां सतह पर नहीं दिखतीं। इसलिए उन्हें पहले गहराई से समझ नहीं पाए। OBC की समस्याएं पहले समझ में आई होतीं, तो बहुत पहले जातिगत जनगणना करवा देते।’

3. तेजस्वी को पप्पू यादव और कन्हैया से चिढ़, उन्हीं को आगे बढ़ाया बिहार की सियासत में चर्चा होती है कि तेजस्वी यादव पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार को पसंद नहीं करते। लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के न चाहने के बावजूद पप्पू यादव को कांग्रेस में शामिल किया गया।

कांग्रेस पप्पू यादव को पूर्णिया से लोकसभा चुनाव का टिकट देती, उससे पहले ही लालू प्रसाद ने बीमा भारती को JDU से लाकर टिकट दे दिया। राहुल बीमा भारती के लिए प्रचार में नहीं गए। पप्पू निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते। बीमा तीसरे नंबर पर रहीं। उन्हें सिर्फ 27 हजार वोट मिले। ये RJD के लिए बड़ा झटका था।

तेजस्वी की नाराजगी के बावजूद पप्पू यादव का कद कांग्रेस में पहले की तरह बना रहा। वोटर अधिकार यात्रा के खत्म होने के 10 दिन बाद 9 सितंबर को दिल्ली में राहुल गांधी ने बिहार की टॉप लीडरशिप के साथ बैठक की। इसमें पप्पू यादव भी शामिल हुए। कांग्रेस की इंटरनल सर्वे रिपोर्ट में भी जिक्र है कि सीमांचल में पार्टी के कैंडिडेट पप्पू यादव तय करेंगे।

कन्हैया कुमार की बात करें, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में वे बेगूसराय सीट से CPI के उम्मीदवार थे। उनका मुकाबला BJP के गिरिराज सिंह से था। लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने कन्हैया कुमार का साथ नहीं देकर तनवीर हसन को चुनाव लड़ाया। दिल्ली में हुई मीटिंग में भी कन्हैया कुमार मौजूद थे। ये पहली बार है, जब बिहार के विधानसभा चुनाव में कन्हैया कुमार एक्टिव दिख रहे हैं।

एक्सपर्ट बोले- तेजस्वी घिर गए हैं, कांग्रेस हावी पॉलिटिकल एनालिस्ट ओम प्रकाश अश्क कहते हैं, ‘राहुल गांधी के साथ वोटर अधिकार यात्रा के बाद तेजस्वी के तेवर बदल गए हैं। तेजस्वी ने राहुल का पूरा साथ दिया। राहुल को PM कैंडिडेट और खुद को CM कैंडिडेट बताया। राहुल PM कैंडिडेट बताने पर खुश हुए कि नहीं, ये तो नहीं पता लेकिन CM फेस पर वे कुछ नहीं बोले। अब कांग्रेस 70 सीटें मांग रही है। इसमें भी 32 सीटें ऐसी हैं, जहां जीत की संभावना हो।’

‘यह भी चर्चा है कि सरकार बनने पर कांग्रेस को डिप्टी CM का पद चाहिए। 2020 में कांग्रेस सिर्फ 19 सीटें जीत पाई थी। वोटर अधिकार यात्रा के बाद उसे लगता है कि इतनी हवा बन गई है कि पार्टी मनमानी सीटें ले सकती हैं। इसी के बाद तेजस्वी यादव ने मुजफ्फरपुर में कहा कि तेजस्वी 243 सीटों पर लडे़गा।’

‘RJD में मन में ये खटका है कि कांग्रेस ऐन वक्त पर धोखा न दे दे। दिल्ली और हरियाणा में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को किनारे कर अकेले लड़ने का फैसला लिया था, बिहार में भी ऐसा ही होने का खतरा है।’

‘बयान से तेजस्वी ने अपनी दावेदारी को मजबूती दी’ पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रवीण बागी कहते हैं, ‘वोटर अधिकार यात्रा का क्रेडिट राहुल गांधी ले गए। उस यात्रा से कांग्रेस मजबूत हुई है। उसी के जवाब में तेजस्वी यादव बिहार अधिकार यात्रा पर निकले हैं। वे बताना चाहते हैं कि महागठबंधन की तरफ से बिहार के सबसे बड़े नेता वही हैं।’

‘तेजस्वी ने कहा कि जनता तय करेगी बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा। इस बयान को ऐसे देखना चाहिए कि तेजस्वी कह रहे हैं कि बिहार के लोग उन्हें ही मुख्यमंत्री चुनेंगे।’

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तेजस्वी यादव ने अपनी दावेदारी को और ज्यादा मजबूत किया है। वे कहना चाहते हैं कि कांग्रेस नहीं चाहती तो क्या हुआ, जनता उनके नाम पर मुहर लगाएगी।

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इससे पहले शहाबुद्दीन के मुद्दे पर बैकफुट पर आए थे तेजस्वी तेजस्वी के रुख में एक और बड़ा बदलाव बाहुबली और RJD से सांसद रहे शहाबुद्दीन के परिवार को लेकर दिखा था। तेजस्वी यादव ने शहाबुद्दीन के परिवार से दूरी बना ली थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने सीवान सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था।

हिना शहाब दूसरे नंबर पर रहीं। JDU की विजयलक्ष्मी देवी को जीत मिली। RJD ने विधानसभा अध्यक्ष रहे अवध बिहारी चौधरी को कैंडिडेट बनाया था, लेकिन वे तीसरे नंबर पर रहे।

इसके बाद तेजस्वी यादव ने शहाबुद्दीन के परिवार की फिर से RJD में शामिल किया। अब पार्टी शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा को विधानसभा चुनाव का टिकट दे सकती है।

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ये खबर भी पढ़ें… पप्पू यादव के बहाने कांग्रेस का तेजस्वी को मैसेज

तेजस्वी यादव को पप्पू यादव से इतनी चिढ़ थी कि उन्होंने न सिर्फ लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव की सीट पूर्णिया में सबसे ज्यादा रैली की बल्कि उन्होंने ये तक कह दिया था कि पप्पू यादव को वोट मत करिए, चाहे किसी को दे दें। वोटर अधिकार यात्रा में राहुल ने पप्पू यादव से दूरी बनाए रखी, लेकिन दिल्ली की बैठक में उनकी मौजूदगी से साफ है कि कांग्रेस को पप्पू यादव से परहेज नहीं है। पढ़िए पूरी खबर…



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