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धर्मशाला नगर निगम में 1.4 करोड़ का लीज घोटाला: कांग्रेस शासित निगम पर भ्रष्टाचार के आरोप; सरकारी खजाने को ₹1.4 करोड़ का नुकसान – Dharamshala News

धर्मशाला नगर निगम में 1.4 करोड़ का लीज घोटाला:  कांग्रेस शासित निगम पर भ्रष्टाचार के आरोप; सरकारी खजाने को ₹1.4 करोड़ का नुकसान – Dharamshala News

धर्मशाला नगर निगम (एमसी) इन दिनों भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता को लेकर चर्चा में है। कांग्रेस शासित निगम पर ‘टेंडर माफिया’ के राज और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के आरोप लग रहे हैं, जिससे जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने सुक्खू सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगम की संपत्ति को कम दाम पर पट्टे पर देने का घोटाला राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पार्षद देवेंद्र सिंह जग्गी पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में सरकारी खजाने को ₹1.4 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। बताया गया है कि 2006 से 2019 के बीच जिस संपत्ति से निगम को केवल ₹18 लाख मिले, उसे कथित तौर पर उप-किराए पर देकर ₹1.61 करोड़ की कमाई की गई। जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ाते हुए मेयर नीनू शर्मा ने 2025-26 के बजट में बिजली उपकर (सेस) को 1 पैसा प्रति यूनिट से बढ़ाकर सीधे 10 पैसा कर दिया है। कांग्रेस की इस नीति से मध्यम वर्ग प्रभावित हुआ है, जबकि शहर की सड़कें और नालियां अभी भी बदहाल स्थिति में हैं। शहर की प्रमुख विफलताओं में अधूरा बस स्टैंड भी शामिल है। 2017 में शुरू हुई धर्मशाला बस स्टैंड परियोजना प्रशासनिक अक्षमता और भूमि विवाद के कारण आज तक पूरी नहीं हो पाई है। यह परियोजना केवल शिलान्यास पत्थरों तक ही सीमित है। इसके अतिरिक्त, निगम में ‘टेंडर माफिया’ के सक्रिय होने के आरोप हैं। मानसून ने खोली ‘खोखले’ इन्फ्रास्ट्रक्चर की पोल जुलाई 2025 में हुई तबाही ने साबित कर दिया कि सरकार के पास कोई ‘डिजास्टर मैनेजमेंट’ प्लान नहीं था। गज खुद पाइपलाइन टूटने से पर्यटन सीजन में शहर 3 महीने तक प्यासा रहा। खनियारा और इंद्रनाम जैसे इलाकों में सड़कें धंस गईं और जल शक्ति विभाग को ₹26 करोड़ का नुकसान हुआ। 10 किलोमीटर लंबी धर्मशाला-मैक्लोडगंज सड़क पर 25 से अधिक लैंडस्लाइड पॉइंट सक्रिय हैं, लेकिन सरकार ‘इंतजार’ की मुद्रा में है। लोकतंत्र पर ‘ताला’: 2 साल से नहीं हुई हाउस की मीटिंग आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि मेयर के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों से नगर निगम सदन की कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है। नतीजतन, जनता की शिकायतें और विकास कार्य फाइलों में दबे हैं। पारदर्शिता का आलम यह है कि ऐतिहासिक धूमू शाह मेले का प्रबंधन भी बिना स्थानीय परामर्श के छीन लिया गया, जिससे वार्ड-13 (दारी) के निवासियों में भारी रोष है।



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