रायपुर के हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) ने हिदायतुल्लाह अंतर्राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता (HIMCC 2026) के आयोजन की घोषणा कर दी है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता नवा रायपुर के विश्वविद्यालय परिसर में मार्च महीने में होग
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प्रतियोगिता के तीसरे संस्करण में भारत और विदेश के प्रमुख लॉ यूनिवर्सिटीज हिस्सा लेंगी। मूल्यांकन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज, वरिष्ठ अधिवक्ता, शीर्ष विधि फर्मों के पार्टनर और विषय विशेषज्ञ करेंगे।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के लिए नकद पुरस्कार रखा गया है। इसमें विजेता टीम को 2 लाख दिया जाएगा। उपविजेता टीम के लिए डेढ़ लाख नकद इनाम रखा गया है।
फिजिकल मोड में होगा आयोजन
कार्यक्रम HNLU परिसर में फिजिकल मोड में आयोजित होगा। मॉडर्न मास्टर मूट कोर्ट हॉल, सहायक न्यायालय कक्ष और 350-सीटर ऑडिटोरियम उपलब्ध। प्रतियोगिता का ग्रैंड फिनाले मुख्य ऑडिटोरियम में होगा।
मूट समस्या: क्लीन एनर्जी और क्लाइमेट जस्टिस पर फोकस
HIMCC 2026 की मूट समस्या क्लीन एनर्जी, एनवायरमेंट सस्टनेबिलिटी और क्लाइमेट चेंज पर बेस होगी। यह विषय विश्वविद्यालय की सामाजिक उत्तरदायित्व और वैश्विक कानून-नीति को समझने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
संचालन की जिम्मेदारी मूट कोर्ट समिति को
- आयोजन अध्यक्ष: प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन, कुलपति
- आयोजन सचिव: डॉ. अनिंद्या तिवारी
- सह-सचिव: डॉ. मयंक श्रीवास्तव, डॉ. अमितेश देशमुख, डॉ. अंकित सिंह सहित अन्य संकाय सदस्य
प्रतिभागियों के लिए नगद पुरस्कार
- विजेता टीम: ₹2,00,000
- उपविजेता टीम: ₹1,50,000
- सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल: ₹75,000
- सर्वश्रेष्ठ वक्ता: ₹75,000
- सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता: ₹50,000
एचएनएलयू ने फिर मजबूत की अपनी पहचान
इस आयोजन के साथ एचएनएलयू ने एक बार फिर खुद को कानूनी शोध, मूट कल्चर और एडवांस्ड लॉ एजुकेशन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य भावी वकीलों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को वैश्विक न्याय व्यवस्था में सार्थक योगदान के लिए प्रेरित करना है।
मूट समस्या के बारे में जानिए
मूट समस्या (Moot Problem) एक प्रकार का काल्पनिक कानूनी मामला (फर्जी/सिम्युलेटेड केस) होता है, जिसे मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाता है। इसे इस तरह बनाया जाता है कि छात्र न्यायालय जैसी स्थिति में वकील बनकर तर्क रखें।
आसान भाषा में समझें- मूट समस्या क्या होती है?
- यह एक कल्पित कोर्ट केस होता है।
- इसमें दो पक्ष होते हैं-याचिकाकर्ता (Petitioner) और प्रतिवादी (Respondent)।
- केस में ऐसे कानूनी मुद्दे होते हैं, जिन पर छात्रों को रिसर्च करके वकील की तरह अदालत में बहस करनी होती है।
- इसमें तथ्यों, कानूनों और मुद्दों को इस तरह रखा जाता है कि असली अदालत जैसा अनुभव मिले।
मूट समस्या क्यों बनाई जाती है?
ताकि लॉ के छात्र:
- कोर्टरूम में तर्क रखना सीखें
- कानूनी अनुसंधान (Legal Research) कर सकें
- केस लॉ और कानून की व्याख्या समझें
- अदालत जैसी वास्तविक स्थिति का अनुभव करें
यह आयोजन भारत के महान न्यायविद्, पूर्व मुख्य न्यायाधीश और पूर्व उपराष्ट्रपति न्यायमूर्ति मोहम्मद हिदायतुल्लाह की विधिक विरासत को समर्पित है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विधि के विद्यार्थियों के लिए उभरता प्रमुख मंच है।
यहां प्रतिभागी जटिल वैश्विक कानूनी मुद्दों पर आधारित सिम्युलेटेड न्यायिक प्रक्रिया में अपनी वकालती क्षमता और शोध कौशल का प्रदर्शन करते हैं।
