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दो दिन की बारिश के बाद लोकायन नदी उफनाई: नालंदा के गांवों पर बाढ़ का खतरा, पश्चिमी तटबंध में करीब 50 फीट का हो चुका कटाव – Nalanda News

दो दिन की बारिश के बाद लोकायन नदी उफनाई:  नालंदा के गांवों पर बाढ़ का खतरा, पश्चिमी तटबंध में करीब 50 फीट का हो चुका कटाव – Nalanda News


टूटे तटबंध का मरम्मत करते कर्मी।

झारखंड और बिहार में पिछले दो दिनों की बारिश ने एक बार फिर नालंदा जिले के हिलसा प्रखंड में बाढ़ की आशंका को उत्पन्न कर दिया। लोकायन नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

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शुक्रवार को धुरी बिगहा गांव के पास लोकायन नदी के पश्चिमी तटबंध में करीब 50 फीट का भीषण कटाव हो गया। बढ़ते जलस्तर के कारण कटाव से धुरीविगहा, छीयासठ बिगहा, कुसेता, फुलवरिया, लक्कड़ बीघा, डोमना बिगहा, मुरलीगढ़, सोहरापुर, दामोदरपुर और चमड़ी सहित एक दर्जन से अधिक गांवों की ओर बाढ़ का पानी तेजी से रुख कर रहा है।

लोकायन नदी के पूर्वी-पश्चिमी तटबंधों में आधा दर्जन से अधिक गांवों के पास पानी के रिसाव की सूचना मिलने के बाद आसपास के ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के दोनों तरफ के तटबंधों में दर्जनों जगहों पर कटाव की आशंका बनी हुई है।

धुरी बिगहा के पास टूटा तटबंध।

प्रशासन अलर्ट, मरम्मत कार्य जारी

नदी में पानी की वृद्धि होने के बाद स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है। एसडीओ अमित कुमार पटेल ने बताया कि नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। धुरी बिगहा गांव के पास तटबंध में कटाव हो गया है। जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में है।

आपदा से निपटने के लिए सभी आवश्यक साधन उपलब्ध हैं। हम तीव्र गति से तटबंध की मरम्मत का काम कर रहे हैं। सैंड बोरी में बालू भरकर रिसाव वाले स्थानों की मरम्मत की जा रही है।

किसानों और प्रशासन की संयुक्त निगरानी

वर्तमान में किसान-प्रशासन मिलकर लोकायन नदी के तटबंधों की लगातार निगरानी में जुटे हुए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत और बचाव कार्यों के लिए टीमें तैनात कर दी हैं।

हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन को और तेजी से काम करना चाहिए, क्योंकि मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में और बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में समय रहते पुख्ता इंतजाम न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

यह क्षेत्र पहले भी बाढ़ की विभीषिका झेल चुका है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार को तटबंधों के स्थायी समाधान पर काम करना चाहिए ताकि हर साल यह आपदा न झेलनी पड़े।



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