डीडवाना – कुचामन जिले के केराप स्थित राजकीय महात्मा गांधी स्कूल की तीन होनहार छात्राओं के लिए 13 मार्च का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। विद्यालय की छात्राएं खुशी मेघवाल, रंजना नायक और ज्योति इस दिन आसमान की ऊंचाइयों को छूते हुए हेलीकॉप्टर की सवारी का अपना सपना पूरा करेंगी। दरअसल, स्कूल में आयोजित एक टेस्ट में टॉप रहने पर जब प्रधानाचार्य ने इन छात्राओं से उनकी इच्छा पूछी थी, तब उन्होंने हेलीकॉप्टर में बैठने की अपनी दिली तमन्ना जाहिर की थी। छात्राओं के इस उत्साह को देखते हुए विद्यालय प्रशासन ने अब उनके इस सपने को हकीकत में बदलने की पूरी तैयारी कर ली है। छात्राओं की हंसी-मजाक की इच्छा को विद्यालय ने लिया गंभीरता से प्रधानाचार्य राजेंद्र ढाका ने इस नवाचार की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि एक दिन कक्षा के टेस्ट के दौरान उन्होंने प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं से हंसी-मजाक में पूछा था कि वे पुरस्कार के रूप में क्या चाहती हैं। इस पर छात्राओं ने कौतूहलवश जवाब दिया कि वे हेलीकॉप्टर में घूमना चाहती हैं। छात्राओं ने तब इसे एक असंभव सा सपना माना था, लेकिन विद्यालय प्रशासन ने उनकी इस इच्छा को सम्मान देते हुए इसे हकीकत में बदलने का निर्णय लिया। ढाका का कहना है कि बच्चों के लिए कुछ भी असंभव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्राओं ने मजाक में जो इच्छा जताई थी, उसे हमने गंभीरता से लिया और अब आगामी दिनों में उन्हें हेलीकॉप्टर की सवारी कराई जाएगी।
नामांकन बढ़ाने और उत्साह जगाने की अनूठी पहल प्रधानाचार्य राजेंद्र ढाका ने सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन पर चिंता व्यक्त करते हुए ‘सपनों की उड़ान’ नामक इस नवाचार की शुरुआत की है। उनका मानना है कि बच्चों का काम सपने देखना है और उन सपनों को धरातल पर उतारना शिक्षकों और समाज का सामूहिक उत्तरदायित्व है। ढाका ने इस बात पर जोर दिया कि आज के प्रतिभावान बच्चे ही देश का भविष्य तय करेंगे, इसलिए उन्हें प्रोत्साहित करना नितांत आवश्यक है। इस पहल के माध्यम से न केवल विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि जागृत होगी, बल्कि समाज का सरकारी स्कूलों के प्रति नजरिया भी सकारात्मक रूप से बदलेगा।
गैर-शैक्षणिक कार्यों का पढ़ाई पर असर सरकारी विद्यालयों की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए प्रधानाचार्य ने स्पष्ट किया कि नामांकन कम होने के लिए केवल शिक्षकों को उत्तरदायी ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों पर बीएलओ ड्यूटी और विभिन्न सरकारी प्रशिक्षणों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों का अत्यधिक बोझ रहता है। इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण शिक्षकों को कक्षाओं में शिक्षण कार्य के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है, जिसका सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की छवि पर पड़ता है। विद्यालय प्रशासन को पूर्ण विश्वास है कि इस तरह के रचनात्मक प्रयासों से न केवल नामांकन की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि छात्र एक बेहतर और उत्साहजनक परिवेश में अपनी शिक्षा जारी रख सकेंगे।
छात्रा खुशी मेघवाल का कहना है कि उसका बचपन से ही सपना था कि वह हेलीकॉप्टर में बैठे। खुशी के साथ उसके दो और साथियों ने स्कूल टेस्ट में अच्छे अंक प्राप्त किए थे, जिसके बाद उनके सर ने उनसे उनकी इच्छा पूछी। छात्रों की इच्छा जानने के बाद सर ने उन्हें हेलीकॉप्टर की सैर करवाकर एक बड़ा सरप्राइज दिया। हेलीकॉप्टर की सवारी को लेकर उत्साहित खुशी ने अपनी ख़ुशी जाहिर की और बताया कि किस तरह उसके सर ने उसके बचपन के सपने को हकीकत में बदल रहे हैं।
छात्रा रंजना ने बताया कि स्कूल में सर ने एक टेस्ट लिया था, जिसमें उन्होंने पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों से उनकी इच्छा पूछी। छात्रा ने बताया कि उसने और उसके साथियों ने मजाक में कह दिया कि उन्हें हेलीकॉप्टर की सैर करनी है। सर ने उनकी इस इच्छा को गंभीरता से लिया और उनके घर जाकर बताया कि वह उन्हें हेलीकॉप्टर की सैर करवाएंगे। पहली बार हेलीकॉप्टर में बैठने को लेकर छात्रा बहुत उत्साहित है और उसने बताया कि यह उसके लिए एक बहुत अच्छा अनुभव होगा।
छात्रा ज्योति ने बताया कि उसकी बोर्ड परीक्षा से पहले स्कूल में एक टेस्ट हुआ था। इस टेस्ट में उसने और उसके दो साथियों ने पहली, दूसरी और तीसरी रैंक हासिल की और अच्छे नंबर लाए। ज्योति ने बताया कि जब उनके सर ने उनसे उनकी इच्छा पूछी तो उन्होंने हेलीकॉप्टर में बैठने की अपनी ख्वाहिश जाहिर की। पहले तो सर ने इस बारे में कुछ नहीं कहा और उसे एक सरप्राइज की तरह रखा। लेकिन बाद में सर ने उन्हें बताया कि वह उनकी इस इच्छा को पूरा करेंगे और उन्हें हेलीकॉप्टर की सैर कराएंगे।
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