पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का फर्जी लैटर वायरल करने के आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल गई हैं। लिंक जज श्रृंगिका जाजू ने सोहना, पंजाब निवासी अमृता धूमाल, मध्यप्रदेश निवासी बिलाल खान, इमाम अहमद और निखिल प्रजापत को जमानत दी। आरोपियों की ओर से कहा गया कि उनका मूल एफआईआर में नाम नहीं हैं, उन्हें इस मामले में फंसाया गया हैं। जो आरोप उन पर लगाए गए है, उनकी जांच में भी लंबा समय लगेगा। ऐसे में जमानत का लाभ दिया जाए। इस पर अदालत ने चारों आरोपियों को जमानत दे दी। निजी चैनल की ओर से कराया गया था मुकदमा
चारों के खिलाफ एक निजी चैनल के रिपोर्टर की ओर से ज्योति नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसमें कहा गया था कि उनके चैनल का लोगो, एंकर और बैक ग्राउंड का उपयोग करते हुए न्यूज वीडियो क्लिप को एडिट करके वसुंधरा राजे के नाम से फर्जी लैटर वायरल किया गया। एफआईआर में किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए जालसाजी करने, जाली दस्तावेजों का उपोयग करने सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। मध्यप्रदेश पुलिस ने लिया था हिरासत में
दरअसल, सोशल मीडिया पर एक पत्र और वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वसुंधरा राजे के हवाले से महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन को लेकर भाजपा के रुख पर सवाल उठाए गए थे। जिसके बाद वसुंधरा राजे ने इस पत्र का खंडन करते हुए इसे फर्जी बताया था। इस पर मध्यप्रदेश पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े 4 लोगों को हिरासत में लिया था। जिसके बाद जयपुर पुलिस उन चारों को गिरफ्तार करके जयपुर लाई थी।
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