पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि जुर्माना या मुआवजा नहीं भर पाने पर दी जाने वाली जेल की सजा बकाया रकम के अनुपात में होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को पैसे नहीं भर पाने पर जरूरत से ज्यादा समय तक जेल में नहीं रखा जाना चाहिए। जस्टिस अनूप चितकारा ने यह टिप्पणी गुलाब सिंह बनाम हरियाणा राज्य व अन्य मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि केवल पैसे नहीं चुका पाने के कारण किसी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। 3.80 लाख के चेक बाउंस का मामला मामला 3.80 लाख रुपए के चेक बाउंस से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने जुलाई 2024 में गुलाब सिंह को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल की साधारण कैद और 5.70 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। बाद में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद गुलाब सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है और पूरी रकम जमा करने की स्थिति में नहीं है। उसने जेल की सजा कम करने की मांग की। हाईकोर्ट ने सजा घटाई, मुआवजा बढ़ाया सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि यदि जेल की सजा कम की जाती है तो मुआवजे की रकम बढ़ाई जाए। शिकायतकर्ता ने 50 हजार रुपए बढ़ाने की मांग की, जबकि आरोपी 40 हजार रुपए बढ़ाने पर सहमत हो गया। हाईकोर्ट ने पाया कि गुलाब सिंह पहले ही 3 महीने 11 दिन जेल में बिता चुका है। अदालत ने कहा कि इतने समय की कैद के बाद न्याय के हित में सजा को पहले से काटी गई अवधि तक सीमित किया जा सकता है। अदालत ने दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए जेल की सजा घटाकर पहले से काटी गई अवधि तक कर दी। वहीं मुआवजे की राशि 5.70 लाख रुपए से बढ़ाकर 6.10 लाख रुपए कर दी गई। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जमा की गई मुआवजा राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज शिकायतकर्ता के बैंक खाते में जारी किया जाए। साथ ही कहा कि यदि गुलाब सिंह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।
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