जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में रविवार देर रात आग लगने से 8 मरीजों की जान चली गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि आग को नियंत्रित करने के लिए गुहार लगाने के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारी मौके से भाग गए।
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सुरक्षा गार्ड को बेसिक जानकारी तक नहीं थी कि फायर फाइटिंग सिस्टम को काम कैसे लेना है। लोग मरीजों को शिफ्ट करने के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। हर कोई अपनी जिम्मेदारी से भागता हुआ दिखाई दिया।
मौतों के बाद सीएम के दौरे की जानकारी मिलते ही जिम्मेदार मौके पर पहुंचे। बताया गया कि कैसे उनकी मेहनत से आग को कंट्रोल किया गया। लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।
परिजन अपने मरीजों को लेकर एसएमएस हॉस्पिटल परिसर के बाहर सड़क पर आ गए।
फायर फाइटिंग सिस्टम चलाना नहीं आता गार्ड राम अवतार शर्मा ने बताया कि उन्हें दिन के 230 रुपए मिलते हैं और उन्हें फायर फाइटिंग सिस्टम चलाना नहीं आता है। 4 से 5 लोगों को बाहर निकालने में लोगों की मदद की है।
जिम्मेदार समय पर एक्टिव होते तो यह घटनाक्रम नहीं होता धरने पर बैठे सीकर के पिंटू गुर्जर (मृतक) के परिजनों ने बताया कि उनकी बस यही मांग है कि उन्हें न्याय चाहिए। उनके मरीज की अस्पताल में मौत हो गई है और डॉक्टर कह रहे थे कि एक-दो दिन में मरीज को छुट्टी मिल जाएगी। परिजनों ने बताया कि उन्हें यह भी नहीं पता कि उनके मरीज का शव कहां है।
प्रशासन से मांग की है कि आगे से ऐसी कोई दिक्कत न हो और किसी और मरीज के साथ ऐसा न हो। भरतपुर की रुक्मणि (मृतक) के भाई दिलीप सिंह ने बताया कि यह हादसा प्रशासन की गलती के कारण हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने लापरवाही नहीं बरती होती, तो यह घटना नहीं घटती।
दिलीप सिंह ने आगे बताया कि रुक्मणि को बचाने के लिए उनका बेटा शेरू गया था, लेकिन धुएं के कारण उसकी तबीयत खराब हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अब उसकी हालत में सुधार है।

हादसे के बाद धरने पर बैठे सीकर के पिंटू गुर्जर के परिजन।
शॉर्ट सर्किट किस कारण से हुआ एसएमएस ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में आग लगने की घटना के बाद एफएसएल (FSL) की टीम मौके पर पहुंच गई है और साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शॉर्ट सर्किट किस कारण से हुआ और आग सबसे पहले कहां पहुंची। साथ ही, टीम यह भी जांच करेगी कि क्या लोगों को बचाया जा सकता था, उस दौरान कितने लोग और स्टाफ वार्ड के अंदर मौजूद थे, और क्या फायर फाइटिंग सिस्टम ठीक से काम कर रहा था। एफएसएल टीम उन सभी पहलुओं पर जांच करेगी कि क्या समय पर कार्रवाई करके और उचित सुरक्षा उपायों का पालन करके लोगों की जान बचाई जा सकती थी। टीम ने आग लगने के कारण जले हुए कई नमूने भी एकत्र किए हैं।

एसएमएस ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में आग लगने की घटना के बाद एफएसएल (FSL) ने घटनास्थल को सील कर दिया है।
विपक्ष ने हादसे को सिस्टम द्वारा की गई हत्या करार दिया हादसे पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि फायर उपकरण, केबल, स्विच, बिल्डिंग और बेड्स जैसे सभी उपकरणों की एक निश्चित समय सीमा होती है और नियमित रूप से यह जांच की जानी चाहिए कि वे कब तक चलेंगे। क्या हम किसी हादसे का इंतजार करते हैं? उन्होंने इसे महज एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या बताया। —————— हादसे से जुड़ी ये 3 खबर भी पढ़िए…
8 जान लेने वाली SMS-अस्पताल की आग 12 तस्वीरों में:जान बचाने के लिए ICU के मरीजों को सड़क पर रखना पड़ा, खुद परिजन लेकर भागे

जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में रविवार देर रात आग लगने से 8 मरीजों की मौत हो गई। रात करीब 11:20 बजे ट्रॉमा सेंटर में आग लगी। इसके बाद परिजन मरीजों को लेकर भागने लगे। पढ़ें पूरी खबर 2. परिजनों का दावा – जलते मरीजों को छोड़कर भागा स्टाफ:20 मिनट पहले ही बताया था आग लगी; किसी का मुंह जला, किसी ने दम घुटने से तोड़ा दम

जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल अग्निकांड में बड़ी लापरवाही के आरोप हैं। पीड़ित परिवारों का दावा है कि- ‘जैसे ही धुआं उठा उन्होंने स्टाफ को बताया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। करीब 20 मिनट बाद आग से पूरा वार्ड घिर गया। हॉस्पिटल स्टाफ मरीजों की मदद करने के बजाय भाग गया।’ (पूरी खबर पढ़ें) 3. जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग, 8 मरीजों की मौत:ट्रॉमा सेंटर के ICU में देर रात हुआ हादसा, 6 सदस्यीय कमेटी जांच करेगी

जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में रविवार देर रात आग लग गई। हादसे में 8 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 3 महिलाएं शामिल हैं। रात 11 बजकर 20 मिनट पर यह आग ट्रॉमा सेंटर में न्यूरो आईसीयू वार्ड के स्टोर में लगी। (पूरी खबर पढ़ें)
