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CSMCL ओवर टाइम भुगतान घोटाला: CDL के वाइस प्रेसिडेंट एन. उदय राव गिरफ्तार, 8 आरोपियों को कोर्ट ने भेजा जेल – Raipur News

CSMCL ओवर टाइम भुगतान घोटाला:  CDL के वाइस प्रेसिडेंट एन. उदय राव गिरफ्तार, 8 आरोपियों को कोर्ट ने भेजा जेल – Raipur News

रायपुर में सामने आए CSMCL ओवर टाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए CDL के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) एन. उदय राव को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, इस मामले में पहले से गिरफ्तार सात आरोपियों को पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद विशेष न्यायालय ने न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में मैनपावर सप्लाई का काम रिकॉर्ड में ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड के नाम पर दर्ज था, लेकिन वास्तविक संचालन एन. उदय राव द्वारा किया जा रहा था। जांच में यह सामने आया है कि वह फील्ड मैनेजमेंट, बिलिंग समन्वय, कर्मचारियों की व्यवस्था और भुगतान संबंधी काम CDL से जुड़ी कंपनी एनकेजेए की ओर से देखता था। 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया EOW-ACB के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवर टाइम, बोनस और अतिरिक्त चार दिनों के कार्य भुगतान के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को करीब 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें ओवर टाइम के नाम पर लगभग 101.20 करोड़ रुपए, बोनस के रूप में 12.21 करोड़ रुपए और अतिरिक्त चार दिनों के कार्य के एवज में 54.46 करोड़ रुपए शामिल हैं। इसके अलावा इन भुगतानों पर सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स के रूप में करीब 15.11 करोड़ रुपए भी दिए गए। अरुणपति त्रिपाठी के निर्देश पर ढेबर को जाता था पैसा जांच में यह भी सामने आया है कि ओवर टाइम और बोनस की बिलिंग उदय राव के निर्देश पर की जाती थी। कमीशन भुगतान को लेकर वह अरुणपति त्रिपाठी से समन्वय करता था। निर्देश मिलने पर रकम अनवर ढेबर तक पहुंचाई जाती थी। एजेंसियों का दावा है कि कर्मचारियों को मिलने वाली राशि फर्जी और बढ़े हुए बिलों के जरिए निकाली गई और उसका इस्तेमाल अधिकारियों तथा कथित सिंडिकेट को कमीशन देने में किया गया। इस मामले में सुमीत फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशन्स समेत कई एजेंसियों को भुगतान किया गया था। अकेले ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड को करीब 34.07 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान मिलने की बात सामने आई है। पूर्व में इन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार इससे पहले नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत दरंदले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन को गिरफ्तार किया जा चुका है। EOW-ACB का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं। अब पढ़िए कैसे हुआ घोटाले का खुलासा इस मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक कार्रवाई से हुई। 29 नवंबर 2023 को ED ने रायपुर में 3 संदिग्धों से 28.80 लाख कैश बरामद किए थे। जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो पता चला कि यह पैसा कर्मचारियों के पसीने की कमाई (ओवरटाइम) का था, जिसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी (IPC 420, 120-बी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। कर्मचारियों को सामने रखकर भरी गई जेब जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। साल 2019-20 से 2023-24 के बीच सरकार ने शराब दुकानों में तैनात कर्मचारियों को अतिरिक्त काम के बदले 115 करोड़ रुपए का ओवरटाइम भुगतान मंजूर किया था। नियम के अनुसार यह पैसा सीधे उन कर्मचारियों को मिलना था, जो एक्स्ट्रा शिफ्ट में काम कर रहे थे। लेकिन मैनपावर एजेंसियों ने कागजों पर कर्मचारियों का ओवरटाइम दिखाया, लेकिन असल में भुगतान उन तक पहुंचा ही नहीं। एजेंसियों ने यह राशि कमीशन के रूप में निकाली। जांच एजेंसी का दावा है कि यह पैसा CSMCL के भ्रष्ट अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के बीच बांटा गया। इसके तार कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़े होने की बात भी सामने आ रही है।



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